उत्तराखंड के दयारा बुग्याल में दूध-मक्खन की होली का उल्लास, ग्रामीण संग पर्यटकों ने आयोजन में की शिरकत
उत्तराखंड के दयारा बुग्याल में वर्षा के बीच भी पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव धूमधाम से मनाया गया, जिसमें दो हजार से अधिक ग्रामीण व पर्यटकों ने दूध-मक्खन की होली खेली।

HighLights
दयारा बुग्याल में अंढूड़ी उत्सव धूमधाम से मनाया गया।
वर्षा के बीच भी दो हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया।
बैड़थात में पारंपरिक दूधगाडू मिल्क फेस्टिवल भी आयोजित हुआ।
जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल में सोमवार को पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव (बटर फेस्टिवल) धूमधाम से मनाया गया। वर्षा में भी बटर फेस्टिवल का उत्साह व उल्लास कम नहीं हुआ। ग्रामीण व पर्यटकों ने विधिवत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर उन्हें दूध-मक्खन अर्पित किया। इसके बाद लोक वाद्य यंत्रों ढोल-दमाऊं की थाप पर दूध-मक्खन की होली खेल ग्रामीणों ने पारंपरिक लोक परंपराओं को जीवंत किया।
दो दिनी पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव(बटर फेस्टिवल) के लिए रविवार से ही स्थानीय ग्रामीण व पर्यटक दयारा बुग्याल पहुंचना शुरू हो गए थे। इस दौरान पहले दिन दयारा के आधार स्थल रैथल गांव से सोमेश्वर देवता की भव्य डोली यात्रा भी निकाली गई।
दयारा पर्यटन विकास समिति की ओर से इस आयोजन के लिए बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व जिले के प्रभारी मंत्री व कबीना मंत्री सौरभ बहुगुणा को आमंत्रित किया गया था। लेकिन वह नहीं पहुंच सके। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में उनके गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट आयोजन में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि यह उत्सव की क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं के प्रतीक हैं। इन आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और देव संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जो सराहनीय है। आयोजन समिति अध्यक्ष मनोज राणा ने बताया कि पंचगांई क्षेत्र के आराध्य सोमेश्वर देवता के पूजा-अर्चना के साथ ग्रीष्मकाल में बुग्यालों में चरने वाले दुधारू पशुओं की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने देवी-देवताओं व आछरी-मांतरियों का आभार जताया।
इसके बाद राधा-कृष्ण रूप में सजे कलाकाराें ने जैसे ही मक्खन से भरी हांडी फोड़ी तो दूध-मक्खन की होली का आगाज हो गया। सुबह दस बजे से लेकर दोपहर बाद तक वर्षा के बीच हाथी घोड़ा-पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयकारों के साथ ग्रामीण व पर्यटकों ने एक-दूजे पर दूध, दही व मक्खन लगाकर बटर फेस्टिवल मनाया।
पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने राधा-कृष्ण के रूप में सजे कलाकारों के साथ यहां रासो-तांदी नृत्य कर समां बांध दिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष मनोज राणा ने कहा कि यह फेस्टिवल अब भव्य रूप लेता जा रहा है, जिसका पर्यटकों को बेसब्री से इंतजार रहता है।
बेड़थात में मनाया गया दूधगाडू मिल्क फेस्टिवल
इधर, गमरी और धनारी पट्टी के शीर्ष पर स्थित बैड़थात में दूधगाडू मिल्क फेस्टिवल मनाया गया। आयोजक टीम के मुकेश जगमोहन चौहानने बताया कि सुबह से ही दोनों पट्टियों के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में बैड़थात पहुंचे, श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य हुण देवता और नागराज देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान देवताओं को दूध और दही से स्नान कराया गया तथा क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
गमरी क्षेत्र के गोपाल प्रकाश मिश्रा ने बताया कि इस दौरान हुण देवता और नागराज देवता के पश्वाओं ने देव-अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे पर मक्खन लगाकर पारंपरिक अंदाज में उत्सव मनाया। गांव क्षेत्र के करीब 5 किलोमीटर दूर बीच जंगल में स्थित बैड़थात में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा।
