जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी: गंगा और यमुना के मायके उत्तरकाशी जनपद भी पेयजल संकट से जूझ रहा है। जिले में एक नहीं बल्कि गंगा घाटी के 25 और यमुना घाटी के 30 गांव के लोग पानी को तरस रहे हैं। हाल यह है कि ग्रामीण पानी के इंतजाम के लिए चार से छह किलोमीटर की पैदल दूरी नापने को मजबूर हैं। कुछ स्थानों पर जल संस्थान टैंकरों के जरिये पानी की आपूर्ति कर रहा है, जबकि अधिकांश स्थानों पर ग्रामीण अपने संसाधनों से पानी का इंतजाम कर रहे हैं।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय के निकटवर्ती ब्लाक डुंडा के मातली, पटारा, मालना, कल्याणी, हरेती, जिनेथ, डुंडा गांव, कौड़ा फेड़ी में सबसे अधिक पानी का संकट है। इसके अलावा, चिन्यालीसौड़ के उटखोला, जिब्या, चिलोट, जेष्ठवाड़ी, कांडी, कोट बागी, खालसी, जोगत तल्ला, तिलपड़, पिपल खंडा, माण, कपराणा, रमोली गांव, इंद्रा टिपरी, धारगढ़, रौंतल में भी लंबे समय से पेयजल संकट की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, नगर पालिका क्षेत्र चिन्यालीसौड़ में पेयजल संकट बरकरार है। वहीं नौगांव ब्लाक के फुवाण गांव, बजलाड़ी, मुराड़ी, सपेटा, नगर पंचायत नौगांव, कफनोल, धारी, कलोगी, नगर पालिका बड़कोट, तेड़ा, छूड़ी, जरड़ा, तियां, मानण गांव, पंगोली गांव सबसे अधिक पानी के संकट से जूझ रहे हैं। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों को देर रात तक जाग कर पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। मोरी ब्लाक के धारा, सुनकुंडी, खंडियासणी में भी ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर पानी के लिए जाना पड़ रहा है।

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जिले के विभिन्न गांवों में पेयजल संकट को दूर करने के लिए टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है। गांव के निकटवर्ती सड़क मार्ग वाले स्थान पर टैंकर भेजे जा रहे हैं। रौंतल, पटारा, चिन्यालीसौड़ सहित कुछ गांवों में पहले से ही पानी का संकट है। पानी को बचाने के लिए आमजन को जागरूक होने की जरूरत है।

-बीएस डोगरा, अधिशासी अभियंता जल संस्थान उत्तरकाशी

Edited By: Jagran