गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, काशीपुर कोतवाल के निलंबन की संस्तुति
कुख्यात गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी में ऊधम सिंह नगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। विभागीय जांच में ...और पढ़ें

HighLights
गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल।
तत्कालीन काशीपुर कोतवाल विक्रम राठौर के निलंबन की सिफारिश।
गिरफ्तारी प्रक्रिया में अनियमितता के लिए विभागीय जांच में दोषी।
जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। एक लाख रुपये के इनामी कुख्यात गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी को यहां की पुलिस ने कभी उपलब्धि के रूप में पेश किया था, लेकिन तब से ही यह प्रकरण विभागीय लापरवाही को लेकर ऊधम सिंह नगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता रहा।
जिस शातिर बदमाश की तलाश उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ को थी, उसे काशीपुर की आईटीआई कोतवाली पुलिस ने सामान्य तमंचे के साथ पकड़ कर अंदर कर दिया। बाद में सेफ कस्टडी के आरोप में यहां की पुलिस पर सवाल उठे तो मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया।
अब विभागीय जांच में तत्कालीन कोतवाल विक्रम राठौर को दोषी मानते हुए उनके निलंबन की संस्तुति की गई है। ऐसे में सवाल केवल एक कोतवाल की भूमिका का नहीं, बल्कि उस पूरी निगरानी व्यवस्था का भी है, जिसके रहते गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठे और कार्रवाई का निष्कर्ष सामने आने में महीनों लग गए।
यह है पूरा मामला
कुछ माह पूर्व काशीपुर की आईटीआई कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी विक्रम राठौर ने यूपी के हिस्ट्रीशीटर योगेश भदौड़ा को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था। योगेश की तलाश उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ को भी विभिन्न आपराधिक मामलों में थी। गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई की परिस्थितियों को लेकर योजनाबद्ध तरीके से गिरफ्तारी किए जाने के आरोप सामने आए।
मामला बढ़ा तो पुलिस मुख्यालय तक इसकी गूंज पहुंची। जिसके बाद विक्रम राठौर को लाइन हाजिर कर दिया गया। जिस कार्रवाई को लेकर स्थानीय पुलिस की पीठ थपथपाई जा सकती थी, वही विभाग के लिए असहज सवालों का कारण बन गई। प्रकरण में तत्कालीन एसपी सिटी रुद्रपुर उत्तम सिंह नेगी को प्रारंभिक जांच सौंपी गई।
जांच में विक्रम राठौर को गिरफ्तारी की प्रक्रिया में योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करने का दोषी माना गया। इसके आधार पर एसएसपी अजय गणपति ने उनके निलंबन की संस्तुति की है। लेकिन इस घटनाक्रम ने जिला पुलिस की पूरी आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि जांच में गिरफ्तारी की प्रक्रिया में अनियमितता सामने आई तो क्या उस समय वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्रवाई की परिस्थितियों की पड़ताल की थी। क्या गिरफ्तारी के तरीके और उससे जुड़े तथ्यों का तत्काल सत्यापन किया गया था। यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल संबंधित इंस्पेक्टर तक सीमित रहेगी या पर्यवेक्षण में चूक की भी जांच होगी।
इस प्रकरण में सबसे अहम सवाल कार्रवाई में लगे समय को लेकर है। मामला पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने के बाद जांच हुई और अब निलंबन की संस्तुति सामने आई है। इस पूरी प्रक्रिया में कई माह लग गए। आखिर ऐसा क्या था, जिसके चलते विभागीय निष्कर्ष तक पहुंचने में इतना वक्त लगा।
गैंगस्टर योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी के मामले में वह निर्दोष हैं। इस प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है और गिरफ्तारी करने वाली टीम में भी उनका नाम शामिल नहीं था। अधीनस्थ पुलिसकर्मियों ने नियमानुसार गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की थी। ऐसे में केवल उनके खिलाफ कार्रवाई किया जाना उचित नहीं है। उन्हें जांच और न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।
-विक्रम राठौर, निरीक्षक
