विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उत्तराखंड छात्रसंघ चुनाव: जलवा बरकरार, भगवामय हुआ सीएम धामी का धाम

Published: Wed, 30 Sep 2026 01:47 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 30 Sep 2026 01:52 PM (GMT+05:30)

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कर्मभूमि खटीमा में भाजपा और अभाविप ने लगातार निकाय, सहकारिता, पंचायत और छात्रसंघ चुनावों में जीत हासिल की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी.  File

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी. File

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राजेंद्र सिंह मिताड़ी, खटीमा। अपनी कर्मभूमि खटीमा को विकास की दिशा नई ऊंचाइयों की सौगात देने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इसका सियासी प्रतिफल भी लगातार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी कर्मभूमि में छोटे से लेकर बड़े चुनावों में भगवा लहरा रहा है। नगर निकाय, सहकारिता और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मिली सफलता के बाद अब छात्रसंघ चुनाव से अभाविप पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जीत ने एक बार फिर खटीमा में धामी की मजबूत सियासी जमीन पर मुहर लगाई है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद भी धामी ने खटीमा में अपना जुड़ाव कम नहीं होने दिया। विकास योजनाओं की लगातार घोषणाओं के साथ उन्हें धरातल पर उतारने पर ध्यान केंद्रित किया। ऑक्सीजन पार्क, अत्याधुनिक गौशाला, प्रस्तावित स्टेडियम, एकलव्य विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय,सड़कें और दूसरी योजनाएं इसकी बानगी हैं।

चुनावों में भी भाजपा लगातार मजबूत होकर उभरी है। नगर निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रमेश चंद्र जोशी ने नगर पालिका अध्यक्ष पद पर बड़ी जीत दर्ज कर विपक्ष को पीछे छोड़ा। सहकारिता के चुनाव में भी विपक्ष दूर तक मुकाबले में नजर नहीं आया। भाजपा की ममता मेहरोत्रा निर्विरोध निर्वाचित हुईं।

पंचायत चुनाव में भी चला धामी का जादू

पिछले साल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आए तो भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्र में भी अपना दबदबा दिखाया। खटीमा क्षेत्र की छह जिला पंचायत सीटों में पांच पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए मुख्यमंत्री की पसंद माने गए अजय मौर्य को पार्टी ने मैदान में उतारा और वह अध्यक्ष बने।

ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर भी भाजपा ने बिना मुकाबले बाजी मार ली और पार्टी समर्थित प्रत्याशी सरिता राना निर्विरोध चुनी गईं। इन नतीजों ने साफ किया कि भाजपा की पकड़ केवल नगरीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी उसका आधार मजबूत हुआ है।

अब छात्र राजनीति में भी लहराया परचम

निकाय, सहकारिता और पंचायत के बाद छात्रसंघ चुनाव में भी मिली जीत ने मुख्यमंत्री की सियासी पकड़ को और मजबूत किया है। जिले के अन्य महाविद्यालयों की तरह मुख्यमंत्री की कर्मभूमि खटीमा में एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर भगवा खेमे का उत्साह और बढ़ा दिया।

हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय महाविद्यालय, खटीमा में एबीवीपी प्रत्याशी धीरज कन्याल ने अध्यक्ष पद पर जीत का झंडा फहरा दिया। छात्र राजनीति में मिली इस जीत को भाजपा की भावी राजनीतिक जमीन के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

विकास के साथ बढ़ा सियासी प्रभाव

खटीमा धामी की राजनीतिक कर्मभूमि है और यहां के चुनावी नतीजों को उनके सियासी प्रभाव से अलग करके नहीं देखा जा सकता। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने खटीमा में विकास योजनाओं को जिस तरह प्राथमिकता दी है, भाजपा कार्यकर्ता लगातार मिली चुनावी सफलताओं को उसी जुड़ाव और विकास की राजनीति का परिणाम मान रहे हैं।

निकाय में गांव की सरकार, सहकारिता से लेकर अब छात्र राजनीति तक एक के बाद एक मिलते सकारात्मक परिणाम यही संदेश दे रहे हैं कि धामी के धाम में भगवा लहरा रहा है।