संवाद सहयोगी, पंतनगर : जीबी पंत विवि के डॉ. आरएस सिंह सभागार में भारतीय कृषि एवं कृषकों की आय वृद्धि हेतु पौध स्वास्थ्य प्रबंधन की आधुनिक तकनीक एवं कीट जोखिम विष्लेषण विषय पर शुक्रवार को प्रशिक्षण शुरू हुआ। मुख्य अतिथि, डॉ. जे. कुमार ने कहा कि मौसम आधारित कृषि एवं पौधों की स्वास्थ्य की वजह से कभी-कभी किसानों की पूरी फसल बरबाद हो जाती है। उस दशा में किसानों की आय एक मजदूर से भी कम हो जाती है। अंतत: इसका प्रभाव हमारे समाज और वातावरण पर पड़ता है। पौध रोग प्रबंधन हेतु कृषि रसायन का इस्तेमाल करने से पहले जोखिम विश्लेषण अवश्य कर लेना चाहिए। यह कृषि के सतत विकास के लिए भी जरूरी है।

विशिष्ट अतिथि, डॉ. पारख जो पंतनगर विवि के पूर्व विद्यार्थी भी रहे हैं, ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को आगाह किया कि विज्ञान के सफलतम व आधुनिक प्रयोग हेतु ज्ञान को अपडेट करना आवश्यक है। हिसार विवि के पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष, डॉ. अनिल कुमार, निदेशक शोध, डॉ. एसएन तिवारी ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

21-दिनी कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के विशिष्ट अतिथि नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लाट जेनेटिक रिसोर्सेज के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. डीबी पारख और हिसार विवि के पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार विशिष्ट थे। कार्यक्रम पादप रोग विज्ञान विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित था। डॉ. करुणा विषुनावत ने आगंतुकों व मुख्य अतिथि का स्वागत किया। डॉ. केपी सिंह ने धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में 11 राज्यों के 23 प्रशिक्षणार्थी हिस्सा ले रहे हैं।

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