संवाद सहयोगी, रुद्रपुर : नजूल भूमि पर बसे परिवारों को उजाड़े जाने के फैसले के खिलाफ सोमवार को रामलीला मैदान में आवाज बुलंद हुई। बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने खुला ऐलान किया कि अगर गरीबों के मकान ढहाए गए तो परिणाम भी भुगतने होंगे। समिति अध्यक्ष राधेश शर्मा ने आत्मदाह की धमकी तक दे डाली। उन्होंने सरकार से जल्द नीति बनाने की मांग भी उठाई।

सोमवार को रामलीला मैदान में बस्ती बचाओ संघर्ष समिति का धरना प्रदर्शन प्रस्तावित था। यह कार्यक्रम था तो गैर राजनीतिक, लेकिन बड़े नेता इसमें खुद-ब-खुद कूद पड़े। पहले पूर्व सांसद बलराज पासी और फिर किच्छा विधायक राजेश शुक्ला आ धमके। दोनों नेताओं के सामने ही सरकार को खुली चुनौती दी गई। हालांकि पूर्व सांसद बलराज पासी भी यही कहते दिखे कि नजूल भूमि पर बसे परिवारों को उजड़ने नहीं दिया जाएगा। उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद सरकार ऐसे परिवारों को बचाने के लिए ठोस कार्रवाई कर रही है। भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार ऐसे परिवारों के साथ खड़ी है। जनपद में बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, काशीपुर से हल्द्वानी में नजूल भूमि पर परिवार बसे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नजूल नीति पर गहराई से मंथन कर उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर करने के पीछे गहरी साजिश बताई।

किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि नजूल नीति का सरलीकरण किया जाएगा। भूमि पर मालिकाना हक के लिए वर्ष 2006 से आंदोलन किया जा रहा है। अब अतिक्रमण हटाने का आदेश हाईकोर्ट का है, न कि सरकार का। उन्होंने कहा कि नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक देने के लिए कानून बनेगा।

कार्यक्रम संयोजक नत्थूलाल गुप्ता ने

कहा कि गरीबों के घरों को बचाने के लिए संघर्ष समिति कोई कसर नहीं छोड़ेगी। एकजुट होकर यह लड़ाई लड़ी जाएगी। इस मौके पर वीरेंद्र तिवारी, शैलेंद्र कोली, गोपी सागर, कमल श्रीवास्तव, डालचंद राजपूत आदि ने भी संबोधित किया।

इस दौरान सौंपे गए ज्ञापन में नगर की मलिन बस्तियों को बचाने और नजूल भूमि पर निवास कर रहे लोगों को मालिकाना हक देने की मांग शामिल की गई। इस मौके पर क्रांति, राजू श्रीवास्तव, राजू गुप्ता, कृष्णपाल, महावीर कश्यप, तस्लीम अहमद, राम¨सह, सैनी सागर, मुकेश पाल, हिम्मत राम, सर्वेश रस्तोगी, सुरेश शर्मा, मीना शर्मा आदि मौजूद थे। इंसेट-

दम है तो पार्टी से निकालकर दिखाओ

जनसभा में भाजपा के जिला मंत्री राधेश शर्मा ने अपने ही संगठन को चुनौती दे दी। कहा कि उन्हें बड़े

पदाधिकारियों द्वारा धमकी दी गई कि यदि समिति के कार्यक्रम में शामिल हुए तो पार्टी से निकाल दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि नेताओं में दम है तो उन्हें पार्टी से निकाल कर दिखाएं। ऐसा करके वे क्षेत्र में जनता का विश्वास भी खो देंगे। पार्टी की बजाय वह जनता के हित को प्राथमिकता देते हैं।

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