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पंत धान-29... पंत जौ-1091... पंत संकर-9 और पीआरबी 2015-2, उत्तराखंड में उगेंगे नए किस्मों के आनाज

Published: Sun, 13 Sep 2026 10:23 AM (IST)

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर की छह उन्नत फसल किस्मों को उत्तराखंड में खेती के लिए मंजूरी ...और पढ़ें

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संसू, पंतनगर। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर के वैज्ञानिकों की छह उन्नत किस्में अब उत्तराखंड के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में किसानों के लिए उपलब्ध होंगी।

देहरादून में सचिव कृषि एवं कृषक कल्याण डा. सुरेंद्र नारायण पांडेय की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड राज्य बीज उप-समिति की 16वीं बैठक में छह फसलों की एक-एक किस्म को प्रदेश में खेती के लिए अनुमोदित किया गया। इनमें धान की पंत धान-29, जौ की पंत जौ-1091, मक्का की पंत संकर-9, राई की पीआरबी 2015-2, ज्वार की पंत चरी-16 और जई की पंत चारा जई-5 शामिल हैं।

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115 दिन में तैयार होगा पंत धान-29

पंत धान-29 अल्प अवधि में पकने वाली बौनी और अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है। यह करीब 115 दिन में तैयार होकर 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है। कम अवधि में तैयार होने से फसल रोग व कीट प्रकोप से भी अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।

पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जौ की उन्नत किस्म

पंत जौ-1091 को पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अनुमोदित किया गया है। तीन वर्ष के परीक्षणों में इसने प्रचलित किस्मों की तुलना में 5.87 से 21.98 प्रतिशत तक अधिक उपज दी। इसकी उपज क्षमता 38.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। यह रतुआ और आवृत कंड रोग के प्रति अवरोधी है।

मक्का और राई भी देंगी बेहतर उपज

पंत संकर-9 को मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुमोदित किया गया है। खरीफ में इसकी उपज क्षमता 84.85 और बसंत में 92.13 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। वहीं राई की पीआरबी 2015-2 ने प्रचलित किस्मों से 12.95 से 15.55 प्रतिशत अधिक उपज दी। यह 134 दिन में पकती है और इसमें 40.8 प्रतिशत तेल की मात्रा है।

चारे की दोनों किस्में पशुपालकों के लिए उपयोगी

पंत चरी-16 से औसतन 828.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हरा और 124.33 क्विंटल सूखा चारा प्राप्त किया जा सकता है। वहीं पंत चारा जई-5 से 599.48 क्विंटल हरा और 131.76 क्विंटल सूखा चारा मिलता है। दोनों किस्में रोग प्रतिरोधी हैं और उच्च गुणवत्ता वाला चारा उपलब्ध कराती हैं।

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वैज्ञानिकों को दी बधाई

कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने छह फसलों की किस्मों के अनुमोदन को विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न के साथ चारे की उन्नत किस्मों से प्रदेश में उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। अधिष्ठाता कृषि डा. अनिल शुक्ला, निदेशक शोध डा. एसके वर्मा और विभागाध्यक्ष डा. जेपी जायसवाल ने भी वैज्ञानिकों को बधाई दी।