संवाद सहयोगी, बाजपुर : वर्षाकाल को देखते हुए शासन-प्रशासन ने कोसी व दाबका नदियों में स्वीकृत खनन पट्टों पर भी अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। लेकिन वन निगम के स्वीकृत पट्टों पर रॉयल्टी 30 जून तक जारी रहेगी। अब इन नदियों से अवैध खनन रोकने को पीएसी का पहरा रहेगा। इसके लिए पुलिस अधिकारियों ने फोर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कोतवाली प्रभारी से रिपोर्ट मांगी है। फोर्स की तैनानी के लिए प्वाइंट चिह्नित करने का कार्य शुरू हो गया है। संभवत: एक-दो दिन में पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी जाएगी।

उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर फैसला देते हुए खनन चुगान वाली नदियों में पैरा मिलिट्री फोर्स लगाए जाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में पिछले कुछ वर्षों से कोसी व दाबका नदियों में पीएसी तैनात थी। इधर, कोरोना महामारी के चलते अधिकांश फोर्स नियमों का पालन करवाने को लगाई गई है। वर्तमान में पट्टाधारकों के घनमीटर समाप्त हो जाने के चलते कोसी व दाबका नदियों के बीच चल रहे सात घाटों के 17 रास्तों को वन विभाग ने जेसीबी से खोद कर फोर व्हीलर वाहनों का आवागमन रोक दिया है। इनमें दो रास्ते उत्तर प्रदेश की ओर खुलते हैं। राजस्व विभाग की मानें तो कोसी नदी के अंदर पट्टाधारकों को स्वीकृत घनमीटर 15 जून को समाप्त हो गए थे, वहीं निगम की रॉयल्टी भी इसी तिथि में रोक दी गई थी। लेकिन सोमवार की शाम जिलाधिकारी ने यी तिथि 30 जून तक बढ़ा दी है। इन नदियों से अवैध चुगान रोकने को दर्जनभर स्थानों पर फोर्स की तैनाती अगले कुछ दिनों में हो सकती है। इसके बावजूद भी अवैध खनन होता पाया गया तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। कोतवाल संजय पांडेय ने बताया कि अत्यधिक अवैध खनन वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर फोर्स की मांग की जा रही है।

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