जागरण संवाददाता, रुद्रपुर: महिला व बाल विकास विभाग के निर्भया प्रकोष्ठ में कार्यरत एक कर्मचारी को हटा दिया गया है। निर्भया कार्यक्रम पर भी खतरे की तलवार लटक रही है। ऐसे में निर्भया से जुड़े कर्मचारियों पर खतरा बना हुआ है। अधिकारी भी इस मामले में खुल कर नहीं बोल रहे हैं।

देश को झकझोर देने वाले निर्भया कांड के बाद शुरू हुआ विभाग दोषियों की मौत से पहले दम तोड़ने पर अमादा है। विभिन्न प्रकार के अत्याचार की शिकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए निर्भया प्रकोष्ठ बनाया गया था। विभाग में पीआरडी कर्मचारी के बतौर जिले की किरन ठाकुर को नौकरी पर रखा गया था। बाद में विभाग में कुछ पदों के लिए वैकेंसी निकली, जिसमें पीआरडी कर्मचारी को भी अनुबंध पर रखे जाने की बात कही गई। एक साल के लिए हुए अनुबंध के बाद भी कर्मचारी को छह माह में ही विभाग से निकाल दिया गया। जानकारी के मुताबिक देहरादून से ही विभाग को खत्म किए जाने की योजना चल रही है। जिसमें निर्भया योजना को वन स्टॉप सेंटर में ही मर्ज किया जा सकता है। जबकि प्रदेश के 11 जिलों में यह कार्रवाई कर दी गई है। जिसमें से देहरादून व ऊधमसिंह नगर को अभी तक मर्ज नहीं किया गया है। दो तीन माह में देहरादून व यूएस नगर में भी यह योजना बंद करने के कयास लगाए जा रहे हैं। ---वर्जन---

किरन को पीआरडी से होने के कारण हटाया गया है। अनुबंध पर होने की बात अस्पष्ट थी, पूरी फाइल पढ़ने के बाद उसे पीआरडी कर्मचारी ही माना गया। जिस कारण काम से हटा दिया गया।

-उदय प्रताप सिंह, डीपीओ, यूएस नगर

Posted By: Jagran

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