संवाद सूत्र, नानकमत्ता: बाबा की बरसी पर हुए संत महासमागम में कहा गया कि सत्संग और सेवा के बिना देह अपवित्र है। नाम जपना ही सब से बड़ी भक्ति है।

रविवार को डेरा कार सेवा में पंथ रतन बाबा हरबंश सिंह, बाबा फौजा सिंह, बाबा टहल सिंह की बरसी पर अखंड पाठ साहिब का भोग पड़ा। जिसके बाद महा समागम में अमृतसर अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरु वचन सिंह ने गुरु वाणी में गुरु की अलख जगाई। कहा कि संत रूपी ही एक परमात्मा है। संत को पहचानो और उसकी सेवा से बड़ा धर्म कोई नहीं है। उन्होंने कहा की ग्रंथों में गुरुओं ने कहा कि सेवा करने वाला जो प्रधान सेवक है वही मेरा रूप है।

उन्होंने कहा कि बिना सत्संग से यह शरीर अपवित्र है। नाम जपना और सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। इससे मनुष्य का बेड़ा पार हो जाता है। ज्ञानी ने कहा सिख के लिए पहला स्नान बऊली साहिब है। जिसमें स्नान करने से पाप दोष सब से मुक्ति मिल जाती है।

उन्होंनें कहा कि कोई पैसों से सेवा करता है। कोई मन सेवा करता है। लेकिन जो अपने हाथों से सेवा करता है वही महान होता है। दिल्ली डेरे के जत्थेदार बाबा बचन सिंह ने गुरुद्वारा दूध वाले कुएं में संगत के स्नान के लिए पवित्र सरोवर की वाहे गुरु के उद्घोष के साथ नींव रखी।

समागम में दिल्ली, हरियाणा, अमृतसर, पंजाब, रीठा साहिब, देहरादून, जम्मू, तथा प्रदेश से आकर हजारों संगत ने ज्ञानी गुरु वचन सिंह के गुरु वाणी में प्रवचन सुनाया।

इस मौके पर दिल्ली के बाबा वचन सिंह, बाबा सुरेन्दर सिंह, पटना साहिब के बाबा कश्मीर सिंह, सीतापुर के बाबा पाल सिंह, बरेली के बाबा रेशम सिंह, काशीपुर के बाबा गुरुजंत सिंह, रीठा साहिब के बाबा श्याम सिंह, पीलीभीत के बाबा चन्दन सिंह, बाबा तरसेम सिंह, दारा सिंह, दिलबाग सिंह, शेर सिंह आदि मौजूद थे।

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