जासं, सितारगंज : हाईकोर्ट के दखल के बाद तीन साल पहले हुए नगर पंचायत शक्तिगढ़ में राजीव गांधी आवास घोटाले में दोषी पाए गए नगर पंचायत अध्यक्ष समेत 17 लोगो का कानून के शिकंजे में फंसना तय माना जा रहा है। 10.84 करोड़ के इस घोटाले में चार महीने पहले एसडीएम की जांच में सत्रह लोग दोषी पाए गए थे। हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई न करने पर जिला प्रशासन को तलब किया है, जिसके बाद दोषियों पर कानून की गाज गिरना तय है।

वर्ष 2015-16 में नगर पंचायत शक्तिगढ़ में राजीव गांधी आवास योजना के तहत 504 आवास बनाए जाने थे, लेकिन 298 आवास बनाए गए वह भी मानक के विपरीत आधे-अधूरे ही। योजना में पात्र लाभार्थियों की जगह आवास दूसरे लोगों को आवंटित किए गए। आवासों के लिए शासन 10 करोड़ 84 लाख रुपए भी अवमुक्त कर दिए थे। आवास योजना में हुई धांधली को लेकर शक्तिफार्म के रमेश राय व प्रेम अरोरा ने वर्ष 2016 में धरना प्रदर्शन किया था, लेकिन उसका कोई असर नही हुआ था, जिसके बाद दोनों ने इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की। इसी के बाद वर्ष 2018 में अदालत के आदेश के बाद जिलाधिकारी ने एसडीएम से मामले की जांच कराई।

जांच अधिकारी निर्मला बिष्ट ने जांच की तो सत्रह लोग दोषी पाए गए। आवास योजना में धांधली की शिकायत सही पाई गई। इसी साल एक अप्रैल को जिलाधिकारी ने कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट शासन को भेजी, लेकिन चार महीने बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नही हुई। इसके बाद शिकायत कर्ता रमेश राय व प्रेम अरोरा ने एक बार फिर हाईकोर्ट में गुहार लगाई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के अंदर मामले में दोषी पाए जाने के बाद भी कार्रवाई न किए जाने के लिए जिला प्रशासन से जबाव तलब किया है।

यह पाए गए थे जांच में दोषी

सितारगंज : एसडीएम की जांच राजीव गांधी आवास योजना में सत्रह लोगों दोषी पाए गए थे। जिनमें नगर पंचायत अध्यक्ष सुकांत ब्रह्मा, तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी जयवीर सिंह राठी, वर्तमान अधिशाषी अधिकारी सरिता राणा, लिपिक सुरेश सिंह, तत्कालीन अवर अभियंता रावेन्द्र पाल सिंह, शगुन गुप्ता, उपेन्द्र सिंह, मीना सरकार, काला चांद दास, संजीव गुप्ता, कैलाश चंद माहेश्वरी, रमेश मिश्रा, जसविदर सिंह, सुनील अरोरा, हर विलास, अशोक कुमार व बैंक मैनेजर सिद्धार्थ कुमार शामिल है।

Posted By: Jagran

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