जागरण संवाददाता, काशीपुर: ऊर्जा निगम में उपभोक्ताओं के बिल जमा करने में सिर्फ कार्यालय सहायक तृतीय की नहीं, बल्कि कई कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है। ऐसे में गबन के मामले की जांच में और कर्मचारियों की भी गर्दन फंस सकती है। इसे लेकर अफसरों व कर्मचारियों के होश उड़े हैं।

विद्युत वितरण उपखंड जसपुर के उपभोक्ताओं ने बिजली बिल जमा कर दिए, मगर इनमें करीब आठ लाख रुपये विभागीय खाते में जमा नहीं हो पाए थे। यह मामला अधिशासी अभियंता अजीत यादव की जांच में सामने आया था। प्रथम दृष्टया इसके जिम्मेदार मानते हुए कार्यालय सहायक तृतीय नितिन को निलंबित कर दिया गया। इस मामले की लेखाधिकारी दीवान राम जांच कर रहे हैं। ऊर्जा निगम के सूत्रों के मुताबिक उपभोक्ता बिल काउंटर पर बिल जमा करता है। काउंटर पर तैनात कर्मचारी विभागीय खाते में जमा करता है। साथ ही इसकी सूचना उसी दिन कैशियर को देता है और कैशियर भी चेक करते हैं। अगले दिन लेखाकार विभागीय खाते व बैंक स्टेटमेंट का मिलान कर चेक करते हैं। साथ ही अधिशासी अभियंता भी जांच करते हैं। खास बात यह है कि जब इतने लोग जांच करते थे तो फिर इस मामले को पकड़ने में एक माह का समय कैसे लग गया। जांच के समय ही मामला पकड़ में आ जाना चाहिए था। लगता है कि जांच में गंभीरता नहीं बरती गई। बताया जा रहा है कि जांच में जिन अफसरों व कर्मचारियों की लापरवाही पाई जाती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। करीब छह माह पहले जसपुर में ही अधिशासी अभियंता सहित चार लोग सस्पेंड हो चुके थे। चर्चा है कि कई और लोगों के खिलाफ कार्रवाई तय है। वर्जन

जांच में जिन भी अफसरों व कर्मचारियों की लापरवाही सामने आएगी। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

राजकुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल काशीपुर

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