जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : हाई कोर्ट के फैसले के बाद नजूल भूमि को लेकर रिश्वतखोरी कर रहे नेताओं और अधिकारियों पर शिकंजा कस गया है। बस्तियों और कालोनियों में कई वर्षो से 50 गज से 200 गज तक की भूमि पर निवास कर रहे 95 प्रतिशत गरीब परिवार फ्री होल्ड की परिधि से कोसों दूर थे। क्योंकि नजूल पॉलिसी की आड़ में फ्री होल्ड के नाम पर सरकार जो पैसे ले रही थी, उससे चार गुना ज्यादा आला अधिकारी ले रहे थे।

ये बातें नजूल भूमि के फ्री होल्ड के खिलाफ हाई कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे पूर्व सभासद रामबाबू ने कही। उन्होंने बताया कि 2014 में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा अवगत कराया गया था कि भाजपा और कांग्रेस की सरकारों में बनी नजूल पॉलिसी की आड़ में बड़ा खेल किया जा रहा है। छोटे भूखंडों को फ्री होल्ड के नाम पर जमा होने वाले सरकारी धनराशि के साथ-साथ चार गुना रिश्वत के रूप में अतिरिक्त लेकर आम जनमानस का शोषण किया जा रहा है। वहीं बड़े भूमाफिया, कॉलोनाइजर को 50 एकड़ से लेकर 200 एकड़ तक के शासकीय रिक्त नजूल भूखंडों को अपनी जेबे गर्म कर भू-माफिया को फ्री में दे दिए गए। बताया कि जब इन भू-माफियाओं को 50 एकड़ से 200 एकड़ तक सरकारी नजूल भूमि फ्री में दी जा सकती है तो आर्थिक रूप से कमजोर, गरीबों, दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज के परिवारों को 50 से लेकर 200 गज तक के भूखंड फ्री में क्यों नहीं दिए जा सकते। कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले से बहुत खुश हुए जिन्होंने याचिका को सही ठहराते हुए स्वीकार कर डबल बैंच द्वारा नजूल पॉलिसी करके जन विरोधी करार देते हुए नजूल पॉलिसी निरस्त कर 2009 के बाद से फ्री होल्ड के नाम पर नियम विरुद्ध किए गए भूखंड की रजिस्ट्रियां निरस्त करने व आर्थिक रूप से कमजोर, गरीबों, दलितों व पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज के परिवारों में आवंटित करने के लिए नई पॉलिसी बनाने के उद्देश्य से खारिज की गई है। जिससे अब सत्ता पर काबिज सरकारों का चेहरा बेनकाब हो गया है।

Posted By: Jagran

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