MBBS प्रवेश के लिए फर्जी प्रमाण-पत्र मामला, ऊधम सिंह नगर के गदरपुर में दो युवक पुलिस हिरासत में
गदरपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश के लिए प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में प्रशासन ने बड़ी ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, गदरपुर। तहसील क्षेत्र में कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास, जाति एवं अन्य प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में सामने आए प्रकरणों में प्रमाण-पत्र निरस्त करने के साथ ही संबंधित मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
जांच के दौरान भूमिका सामने आने पर गदरपुर निवासी निखिल वर्मा एवं शुभम हुडिया को तहसील प्रशासन ने पूछताछ के बाद गदरपुर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया है। दोनों के विरुद्ध अभी मुकदमा दर्ज किया जाना है।
प्रशासन के अनुसार, प्रकरण में प्रमाण-पत्रों का उपयोग देहरादून में नीट परीक्षा के बाद एमबीबीएस में प्रवेश प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाना था। शुक्रवार को तहसीलदार लीना चंद्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा कूटरचित अभिलेखों के आधार पर प्रमाण-पत्र तैयार करवाए गए थे।
जांच के अनुसार, इन प्रमाण-पत्रों का उपयोग एमबीबीएस में प्रवेश प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाना था। संबंधित प्रकरणों में अब तक पांच व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए कूटरचित अभिलेखों के आधार पर जारी स्थायी एवं अनाथ प्रमाण-पत्रों को निरस्त किया गया है।
वहीं, जाति प्रमाण-पत्रों के संबंध में नियमानुसार जिला स्क्रूटनी समिति को संस्तुति भेजी गई है। उन्होंने बताया कि गदरपुर निवासी निखिल वर्मा एवं शुभम हुडिया की भूमिका सामने आने पर दोनों से गहन पूछताछ की गई। इस दौरान उनके बयान भी दर्ज किए गए।
जांच के दौरान दोनों के मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें प्रकरण से संबंधित रिकॉर्डिंग एवं दस्तावेज पाए जाने की जानकारी सामने आई है। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए दोनों मोबाइल फोन पुलिस के सुपुर्द कर दिए गए हैं।
पूछताछ एवं प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दोनों युवकों को तहसील प्रशासन द्वारा गदरपुर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया गया है। दोनों के विरुद्ध अभी मुकदमा दर्ज किया जाना बाकी है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस की ओर से प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार लीना चंद्रा ने बताया उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में जांच की कार्रवाई देर रात से सुबह तीन बजे तक चली।
प्रशासन की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि कूटरचित अभिलेख तैयार कर शासकीय प्रमाण-पत्र प्राप्त करने अथवा उनके आधार पर अनुचित लाभ लेने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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प्रकरण की जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आने पर उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कार्रवाई के दौरान उप जिलाधिकारी डॉ. अमृता शर्मा, तहसीलदार लीना चंद्रा धामी, राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार तथा संबंधित राजस्व कार्मिकों एवं पटवारियों की उपस्थिति में की गई।
