जागरण संवाददाता, रुद्रपुर: धान की नकदी फसल तैयार होने के बाद भी किसानों को उधारी में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। फसल बेचकर दीपावली मनाने का सपना देख रहे किसानों की उम्मीद कमीशन एजेंटों पर टिकी है। यहां के हजारों किसानों का करोड़ों बकाया धान खरीद सॉफ्टवेयर से प्रभावित हो गया है। विभागीय इंजीनियर बीते कई दिनों से सॉफ्टवेयर सुधारने में लगे हैं। इस चक्कर में किसानों का त्योहार फीका पड़ने की आशंका सताने लगी है।

धान का कटोरा कहलाने वाली तराई धान की बालियों से लदी है। इस साल औसत फसल के चलते किसानों के चेहरे पर चिता के भाव हैं। धान की फसल का बकाया मूल्य नहीं मिलने से त्योहार मनाने की चिता भी साफ दिख रही है। जिला मुख्यालय स्थित गल्ला मंडी में 250 के करीब ट्रालियों में धान लदकर रोज पहुंच रहा है। नमी का हवाला देकर घोषित एमएसपी से कम रेट पर ही किसान धान की तौल करा रहे हैं। इसके बाद भी किसान के घर में अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं पहुंची है।

राइस मिलर व कमीशन एजेंट आरएफसी ललित मोहन पर आरोप लगा रहे हैं। वहीं, आरएफसी के डीआरएम वेद प्रकाश धूलिया इसे सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी बता अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। फिलहाल इसके चक्कर में जिले के हजारों छोटे-बड़े किसानों की दीपावली फीकी पड़ सकती है।

बगवाड़ा के किसान अमनदीप विर्क ने बताया कि गल्ला मंडी में उन्होंने करीब 200 क्विंटल धान की बिक्री की है। भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। किसान विक्रम जीत सिंह, इंद्रपाल सिंह, निर्मल सिंह, शुभप्रीत सिंह, हरदेव सिंह भी भुगतान के इंतजार में हैं।

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48 घंटे में भुगतान का नियम

धान खरीद में किसानों को 48 घंटे में भुगतान करने का नियम है। आरटीजीएस के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान होना चाहिए। इसके लिए बकायदा सॉफ्टवेयर बनाया गया है, जिसमें सभी विवरण अपडेट होता रहता है। इसके बाद भी समस्या बनी हुई है।

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सॉफ्टवेयर की समस्या से आरटीजीएस खातों में दिख नहीं रहा है। विभागीय इंजीनियर सॉफ्टवेयर ठीक करने में लगे हुए हैं। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा।

-वेद प्रकाश धूलिया, डीआरएम, आरएफसी कार्यालय, हल्द्वानी

Posted By: Jagran

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