संवाद सहयोगी, खटीमा : पड़ोसी देश नेपाल व उत्तर प्रदेश को जाने वाले जंगलों से आच्छादित रास्तों की निगेहबानी का जिम्मा संभालने वाले झनकईया थाने की खुद की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हैं। वहां के सुरक्षा इंतजामात का आलम यह है कि शाम होते ही थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित ढाबों में नशेडि़यों की महफिलें सजती हैं। यह सब थाना पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। मयखानों में तब्दील होने वाले इन ढाबों की तरफ वहां की पुलिस कभी रूख तक नहीं करती। यही वजह है कि थाना क्षेत्र में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।

सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के मकसद से झनकईया चौकी को थाने में तब्दील किया गया था। इसके अंतर्गत लोहियाहेड व चूका पुल पर पुलिस चौकियों का निर्माण भी किया गया। बता दें कि झनकईया थाने के अंतर्गत नेपाल से लगी सीमा के अलावा उत्तर प्रदेश का बॉर्डर भी लगता है। चूका पुल चौकी के आगे से पीलीभीत जिले की सीमा शुरू हो जाती है। यह मार्ग जंगलों के बीच से होकर गुजरता है। इसी रास्ते से गोवंश व मादक पदार्थो की तस्करी की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। कुछ दिन पूर्व इसी मार्ग पर दो लोगों को मारपीट कर उनकी बाइक लूट ली गई थी। जिसका आज तक पता नहीं चल सका है। इसके अलावा महिलाओं व युवतियों से छेड़छाड़ की भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से कई मामलों में पीडि़त लोक लाज की वजह से पुलिस तक नहीं पहुंचते। इतना होने के बाद भी झनकईया थाने की पुलिस की कार्यप्रणाली में किसी तरह का बदलाव होता नहीं दिख रहा है। जो सीमांत की सुरक्षा की दृष्टि से शुभ संकेत नहीं है।

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चूका चौकी में लटके ताले

उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड की सीमा में स्थित चूका पुलिस चौकी अस्तित्व में भले ही आ गई हो, लेकिन वहां अब तक ताले लटके हुए हैं। चौकी में कोई भी पुलिस कर्मी नहीं रहता है।

Posted By: Jagran