जागरण संवाददाता,रुद्रपुर : बिजली चोरी रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर बनाई गई टीमें विभाग के लिए ही नासूर साबित हो रही हैं। बड़े पैमाने पर बिजली चोरी कराने के लिए इनकी मिलीभगत भी सामने आ रही है। बीते माह छापेमारी में कई संदिग्ध कर्मचारियों के नाम विजिलेंस के एसपी को पता लगे थे। पता चला कि स्थानीय स्तर पर छोटे प्रतिष्ठान व सरकारी कार्यालयों में बिना मीटर लगे होने के बाद बिल कम आए। इसके लिए टेंपरिग की जा रही है। इसमें स्थानीय कर्मचारियों का पूरा हाथ है। टीम आम जनता को तो बिजली चोरी में पकड़ रही है मगर सरकारी विभाग पर नजर नहीं पड़ रही है।

ऊर्जा निगम की तरफ से बिजली चोरी रोकने के लिए देहरादून से आई विजिलेंस टीम ने पिछले माह ही कार्रवाई की थी। अभी पिछले सप्ताह ही बड़ी संख्या में ऊर्जा निगम के अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। स्थानीय स्तर पर जेई व लाइनमैन की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर विजिलेंस टीम की तरफ से अंदरखाने सभी को चेतावनी दी जा चुकी है। कहा गया कि नियमित तौर पर बड़े लोड का उपभोग कर रहे उपभोक्ता, जिसमें सरकारी भंडारण केंद्र भी शामिल हैं, मीटर की टेंपरिग कर बिजली का उपभोग करने की शिकायतें हैैं। मौके पर टीम के जाने से पहले यहां सब कुछ व्यवस्थित कर लिया जाता है।

अधीक्षण अभियंता एनएस टोलिया ने बताया कि शिकायतें मिल रही हैं। जल्द ही ऐसे बड़े उपभोक्ता, जिसमें सरकारी व अर्ध सरकारी विभाग, वेयर हाउस शामिल हैं, पर शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए विजिलेंस टीम को पूर्व में सूचना देनी होती है क्योंकि टीम देहरादून से सलेक्ट होती है। इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। एक साल में ही बिजली चोरी करने वालों से एक करोड़ 72 लाख रुपये का जुर्माना वसूला जा चुका है। बीते साल ही गदरपुर में विभागीय मिलीभगत से फ़्लोर मिल संचालक पर भी कार्रवाई की गई थी। इसमें अधिशासी अभियंता से लेकर एसई तक नप गए थे। इसके बाद भी विभागीय अधिकारियों का रहमोकरम सरकारी विभागों से लेकर निजी प्रतिष्ठानों पर कम होने का नाम नहीं ले रहा।

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