जीवन सिंह सैनी, बाजपुर : प्रसिद्ध निष्कलंक माता उत्सव बाजपुर में पांच दिसंबर को मनाया जाएगा। जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 26 दिसंबर से माता मरियम के ग्रोटों में रोजाना प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा।

वर्ष 1950 में सेंट मेरी चर्च की स्थापना के बाद मां मरियम निष्कलंक माता को समर्पित कर तीर्थ स्थल घोषित किया गया। देशभर के छह तीर्थ स्थलों में उत्तराखंड का यह एकमात्र तीर्थ स्थल शामिल है। इसके अतिरिक्त यूपी में सरधना मेरठ, झांसी, आगरा, तमिलनाडू में बैलोकनी, बैंगलुरू, केरल के मंगलौर में यह तीर्थ स्थल स्थापित हैं। निष्कलंक माता उत्सव बाजपुर में दिसंबर माह के प्रथम रविवार को मनाए जाने की परंपरा है। पवित्र बाइबिल के अनुसार मरियम को जन्म अन्ना और जोकिम के घर बेपुलहेम (वर्तमान में यूरोस्लम) में दो हजार वर्ष पूर्व हुआ था। 21 वर्ष की आयु में मरियम का विवाह यूसुफ के साथ तय किया गया, लेकिन शादी से पूर्व ही आठ दिसंबर को प्रभु ने आकर संदेश दिया कि उनके घर ईश्वर अवतरित होने वाले हैं, जिनका जन्म मरियम की कोख से होगा जिनका नाम प्रभु यीशु रखा जाए। मरियम ने विवाह के बाद 25 दिसंबर को प्रभु यीशु को जन्म दिया। यहीं से मरियम को निष्कलंक माता का दर्जा दिया गया। प्रभु के गर्भाधारण दिन को विश्व में मां मरियम गर्भाधारण दिवस के रूप में मनाया जाता है। तीर्थ स्थल पर मिलती है कष्टों से मुक्ति

बाजपुर : मान्यता है कि बाजपुर में स्थापित मां मरियम का तीर्थ स्थल माता का पवित्र स्थान है। यहां 35 वर्षों से लोगों को कष्टों से मुक्ति मिलती आ रही है। इसी सोच को लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के साथ देशभर के प्रांतों से लोग यहां पहुंचते हैं। यह होगा कार्यक्रम

सुबह साढ़े सात बजे से मिस्सा बलिदान, नौ बजे से माला विनती और चंगाई की आशीष, दस बजे शोभा यात्रा और इसके उपरांत अन्य कार्यक्रम होंगे। -------------------------------------------------------------

कोट

सेंट मेरी चर्च में पांच दिसंबर को निष्कलंक माता का उत्सव मनाया जाएगा। जिसके लिए चर्च को सजाने के साथ ही नौ दिवसीय सत्संग चल रहा है। पांच एकड़ क्षेत्र में मेले का आयोजन किया जाना है।

- फादर फ्रांसिस पिटो पल्ली पुरोहित सेंट मेरी चर्च, बाजपुर

Edited By: Jagran