कंचन वर्मा, रुद्रपुर

नगर निगम की रुद्रपुर सीट पर आरक्षण की स्थिति साफ होने के साथ ही चुनावी कसरत तेज हो गई है। बड़ा सवाल यह है कि पूर्व की तरह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर सोनी कोली फिर भाजपा का चेहरा होंगी या फिर कोई और। भाजपा के गुट इसके लिए कोशिशों में जुट गए हैं। लेकिन मलिन बस्तियों में बड़ी संख्या में कोली वोट के चलते संगठन की पसंद सि¨टग मेयर सोनी ही मानी जा रही हैं। 14 फीस कोली वोट उनकी मजबूती का बड़ा आधार हैं। साथ ही पांच साल निर्विवादित रहते हुए उनकी कार्यशैली भी एक बड़ी वजह है।

नगर निगम का तमगा मिलने के बाद लगातार दूसरी बार रुद्रपर सीट अनुसूचित जाति के खाते में गई है। पिछली मर्तबा यह सीट अनुसूचित महिला थी, इस बार सिर्फ अनुसूचित जाति, यानी पुरुष हो या महिला, कोई भी चुनाव लड़ सकता है। 18 फीसद से अधिक यहां अनुसूचित जाति के वोटर हैं। उनमें भी कोली समाज की संख्या खासा 14 फीसद है। पिछले चुनाव में यह एकमुश्त वोट कोली को मिला था और साढे़ छह हजार से भी अधिक वोटों ने उन्होंने कांग्रेस की ममता रानी को मात दी थी। ऐसा तब जबकि मुस्लिम वोट पर एक सिरे से कांग्रेस ने कब्जा था। खैर, सोनी कोली को पांच साल शहर की किस्मत चमकाने के लिए मिले। हालांकि चार साल कांग्रेस सरकार रहते रुद्रपुर की उपेक्षा के आरोप लगते रहे। पिछले एक साल में शहर में विकास कार्यों को गति मिली। कई सड़कों को नया जीवन मिला और सामुदायिक भवन के साथ ही बस शेल्टर और पार्कों का जीर्णोद्धार भी हुआ। हालांकि टेंडर में पूल को लेकर भी कांग्रेसी पार्षद आरोप लगाते रहे। कांग्रेसी पार्षदों के साथ-साथ कई बार तो भाजपा पार्षद भी आवाज बुलंद करते देखे गए। खैर, इस सबके बीच मेयर की कार्यशैली को लेकर सवाल नहीं उठे। पारिवारिक महिला के तौर पर वह नगर निगम का कार्य भी भली-भांति निपटाती रहीं। अब एक बार फिर यह सीट अनुसूचित जाति के खाते में जाने से दावेदारों को झटका लगा है। खासकर वे दावेदार, जिन्होंने शहर को होर्डिंग से पाट रखा था, जिधर देखो मानकों को ताक पर रखकर नेता जी के फोटो नजर आते थे, अब बड़ा सवाल यह है कि भाजपा के टिकट पर चेहरा कौन होगा। सोनी कोली के साथ ही उनके पति सुरेश कोली भी पांच साल लगातार जनता के बीच रहे हैं। सोनी नहीं, तो दूसरा विकल्प वह भी बन सकते हैं। वहीं भाजपा के दूसरे गुट जिनकी पैरवी कर रहे हैं, उनका कोई जमीनी आधार नहीं है। ऐसे में सि¨टग मेयर को ही पार्टी मौका दे सकती है। भविष्य की संभावनाओं पर सबकी नजर है। इनसेट-----------

कांग्रेस की हवा आवास विकास की ओर

पिछले निगम चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी ममता रानी थीं। साढे़ छह हजार से अधिक वोटों से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। ऐसा तब, जबकि सूबे में कांग्रेस की सरकार थी। अब हवा उल्टी चलती नजर आ रही है। ममता रानी को मौका मिलेगा या नहीं, ये बात दीगर है, लेकिन सूत्रों की मानें तो पार्टी का रुझान आवास विकास की ओर है। यहां से एक परिवार की महिला को मौका दिया जा सकता है। हालांकि यह परिवार राजनीति से कोसों दूर है। इनसेट-----------

राजनीतिक दृष्टि से मजबूत हैं कोली

मेयर सोनी कोली के पति सुरेश भाजपा अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। प्रदेश मंत्री के साथ ही भाजपा मेन बॉडी और भाजयुमो में नगर महामंत्री भी रहे हैं। उनकी सास रामवती सामान्य सीट पर चुनाव जीतकर वर्तमान में क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। इसके अलावा ससुर प्रसादी लाल कोली भाजपा मेन बॉडी में नगर मंत्री और नगर उपाध्यक्ष के साथ ही रामजन्मभूमि आंदोलन में 14 दिन अल्मोड़ा जेल में रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दृष्टि से सोनी कोली को मजबूत देखा जा रहा है। इनसेट------------

बड़े-बड़ों की बत्ती गुल

रुद्रपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने से बड़े-बड़ों की बत्ती गुल हो गई है। भाजपा की बात करें तो सीट सामान्य होने की आस में 10 दावेदार टकटकी लगाए बैठे थे। भाजपा जिलाध्यक्ष शिव अरोरा और जिला महामंत्री रहे भारत भूषण चुघ प्रबल दावेदार थे। वहीं सीट ओबीसी होने के इंतजार में भी छह से अधिक दावेदार लाइन में थे। कांग्रेस की बात करें तो सामान्य सीट होने पर प्रबल दावेदार पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा थीं। उनको भाजपा प्रत्याशी से टक्कर लेने में भी सक्षम माना जा रहा था।

वर्जन---------

पार्टी का जो आदेश होगा, उस पर अमल किया जाएगा। पांच साल शहर में बिना भेदभाव के विकास किया है। शहर को विकास के पायदान पर खड़ा किया गया है। हर वार्ड में समान रूप से विकास कार्य कराए हैं।

-सोनी कोली, निवर्तमान मेयर नगर निगम, रुद्रपुर

Posted By: Jagran

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