रुद्रपुर: डायट रुद्रपुर में आइसीटी पर आधारित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार में कंप्यूटर, मोबाइल व प्रोजेक्टर सहित अन्य तकनीकी माध्यमों से शिक्षण को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। शिक्षण पद्धति को और बेहतर बनाने पर वक्ताओं ने विचार रखे। सेमिनार का उद्देश्य उत्तराखंड में शिक्षकों द्वारा आइसीटी के माध्यम से किए गए कार्यों की जानकारी देना व नवाचारी तथा आइसीटी की शिक्षा पद्यति की बेहतरी को उजागर करना है।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में मंगलवार को आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में चम्पावत, अल्मोड़ा, नैनीताल व देहरादून सहित अन्य जनपदों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता डिपार्टमेंट ऑफ इंफार्मेशन टेक्नॉलाजी पंत विवि के विभागाध्यक्ष डॉ. एचएल मंदोरिया ने आइसीटी के बारे में बताया। कहा कि सर्वप्रथम आइसीटी क्या है और कक्षा कक्ष में विषय विशेष से जोड़ते हुए इसका प्रयोग किस प्रकार करना है, इसे समझना होगा। यह पद्धति बच्चों के लिए बहुत रुचिकर है। साथ ही उन्होंने बताया कि बच्चों को अद्यतन करने के साथ ही हमें स्वयं भी सीखने को मिलेगा।

डायट प्राचार्य ने धर्म सिंह रावत ने कहा कि डायट आइसीटी के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है। आइसीटी के साथ नवाचारी कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। जिसमें सामग्री विकास ऑनलाइन प्री एवं पोस्ट टेस्ट, ऑनलाइन अकादमिक गतिविधियां शामिल हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र आर्य ने शिक्षकों को शिक्षण के लिए प्रेरित किया। सहायक प्रोफेसर पंतनगर विवि डॉ. सोनिया चौहान ने डायट के शैक्षिक तकनीक पर प्रकाश डाला। सेमिनार के समन्वयक बीपी जोशी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. अजंता बिष्ट एवं अनु डालाकोटी ने किया। इस मौके पर अशुतोष शर्मा, सीमा त्रिवेदी, डॉ. गीता किरण, रुचि पाठक, सीमा नैथानी, प्रेमचंद, मनोज कुमार जोशी, डॉ. दीपक सक्सेना, केके शर्मा, आमेद सक्सेना, महेश पांडेय, ऊषा टम्टा, अनीता रावत, केएस ऐरी आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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