संवाद सहयोगी, रुद्रपुर : मनमानी फीस और महंगी किताबों ने जिले के 19 स्कूलों पर कार्रवाई का फंदा डाल दिया है। शासन ने इन स्कूलों के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार करते हुए कार्रवाई के लिए ठोस कदम उठाया है। इन स्कूलों की मान्यता रद होने की कगार पर है। निदेशालय कभी भी यह निर्णय ले सकता है, इनमें शहर के चार बड़े स्कूल शामिल हैं।

प्रदेश सरकार ने शैक्षिक सत्र 2018-19 जुलाई से निजी हो या सरकारी सभी स्कूलों में एनसीइआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर दी थीं। कई निजी स्कूलों ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट दायर की थी, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई के बाद एनसीइआरटी अनिवार्यता बरकरार रखते हुए निजी स्कूलों के लिए एक या दो रिफरेंस बुक लगाने के आदेश दिए थे, साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिए थे कि रिफरेंस बुक की कीमत एनसीइआरटी के समकक्ष होनी चाहिए। जिले में 790 प्राथमिक और 290 माध्यमिक सरकारी विद्यालय हैं। वहीं बात करें निजी स्कूलों की कक्षा एक से 12 तक में कुल 1253 सीबीएससी, आइसीएससी एवं मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। एनसीइआरटी लागू होने के बाद ऊधम¨सह नगर के कुछ विद्यालयों की शिकायत अभिभावकों ने निदेशालय तथा समाधान पोर्टल पर की थी। जिस पर शिक्षा निदेशालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए देहरादून से रुद्रपुर टीम भेजी। टीम ने जनपद के सातों ब्लॉक में डेरा डाल मामले की गहनता से जांच पड़ताल करने के बाद मामला सहीं पाया गया। रुद्रपुर, गदरपुर, जसपुर, काशीपुर, सितारगंज, खटीमा और नानकमत्ता में 19 ऐसे विद्यालय पाए गए जो शिक्षा विभाग के मानकों का उल्लंघन तो कर रहे हैं, साथ ही एनसीइआरटी का पालन भी नहीं कर रहे थे।

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शिकायत मिलने पर निेदेशालय ने टीम बनाकर जांच कराई थी। जिसमें जनपद में रुद्रपुर, काशीपुर, सितारगंज सहित सातों ब्लॉक में जांच के बाद 19 स्कूलों की शिकायत सही पाई गई है। रिपोर्ट निदेशालय भेज दी गई है। स्कूलों की एनओसी रद की जाएगी।

- रवि मेहता, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक, ऊधम¨सह नगर

Posted By: Jagran