जागरण संवाददाता, नई टिहरी: कीर्तिनगर के मलेथा ग्राम पंचायत का सेमवाल गांव अब पलायन की मार से उबरने लगा है। पिछले साल गांव में सड़क पहुंची, तो पलायन कर गांव छोड़ चुके परिवार लौटने लगे हैं। अभी तीन परिवारों ने गांव में नए मकान बनाए हैं और वहीं पर रहने लगे हैं। आजादी के बाद से ही सड़क सुविधा से वंचित सेमवाल गांव से पिछले कुछ सालों में लगभग बीस परिवारों ने पलायन कर गांव छोड़ा था।

कीर्तिनगर के मलेथा ग्राम पंचायत का सेमवाल गांव इन दिनों गुलजार नजर आ रहा है। पिछले साल अगस्त माह में डेढ़ किलोमीटर सड़क बनकर तैयार हुई तो गांव में पहली बार कार और बाइक पहुंची। गांव में सड़क का इंतजार करते हुए पांच परिवार ही बाकी रह गए थे। वार्ड सदस्य मधुसूदन सेमवाल बताते हैं कि लंबे समय से ग्रामीण सड़क की मांग कर रहे थे। मलेथा से दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई कर गांव आना पड़ता था, जिस कारण गांव से पिछले कुछ समय में लगभग बीस परिवार पलायन कर गए थे। देहरादून, दिल्ली, ऋषिकेश में यह लोग बस गए थे। गांव में मात्र पांच परिवार ही रह गए। पिछले साल विधायक विनोद कंडारी ने विधायक निधि से डेढ़ किमी सड़क बनवाई तो अब गांव में लोग लौटने लगे हैं। पिछले कुछ महीनों में जगदीश सेमवाल, दिनेश सेमवाल और विमल सेमवाल ने गांव में नए मकान बनाए हैं और अब गांव में ही रहने लगे हैं। एक अन्य परिवार भी मकान की मरम्मत करा रहा है। गांव में अब नौ परिवार हो गए हैं। कुछ अन्य लोग भी गांव लौटने की तैयारी कर रहे हैं। गांव में मकान बनाने वाले विमल सेमवाल ने बताया कि गांव में सड़क न होने के कारण वह नहीं आते थे और देहरादून में ही रह रहे थे। लेकिन अब गांव में उन्होंने मकान बनाया है और अब वह गांव में ही रहेंगे। गांव में सड़क पहुंचने से अब पलायन कर चुके लोग लौट रहे हैं। डेढ़ किमी सड़क विधायक निधि से बनाई गई है।

विनोद कंडारी, विधायक देवप्रयाग

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