जागरण संवाददाता, नई टिहरी: श्रीदेव सुमन विवि से पीएचडी करने के लिए युवाओं को अभी अगले सत्र तक इंतजार करना होगा। विवि में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण विवि प्रशासन प्री पीएचडी प्रवेश परीक्षा शुरू नहीं करा पा रहा है। हालांकि विवि का कहना है कि पीएचडी के लिए तैयारियां पूरी हैं, लेकिन अधिकारियों की नियुक्ति न होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

श्रीदेव सुमन विवि वर्ष 2019 से पीएचडी शुरू कराने की तैयारी में है, लेकिन विवि से पीएचडी के लिए युवाओं को इंतजार करना पड़ रहा है। इसी सत्र से विवि ने प्री पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने की दावा किया था, लेकिन अब सत्र आधे से ज्यादा होने के बावजूद प्री पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी है। विवि ने पहले चरण में रसायन, जंतु विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित, जियोलाजी, हिदी, इतिहास, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, भूगोल, रक्षा विज्ञान, शिक्षा शास्त्र और वाणिज्य विषय के लिए 70 सीटें निर्धारित की हैं। लेकिन, विवि में प्रशासनिक अधिकारियों की कमी के कारण विवि पीएचडी में प्रवेश नहीं करा पा रहा है। इसके कारण छात्र-छात्राओं को भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। विवि सूत्रों की मानें तो अब अगले सत्र में ही पीएचडी में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।

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विवि में प्री पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तैयारियां पूरी हैं, लेकिन कुछ कारणों से इस सत्र में परीक्षा संभव नहीं हो पा रही। अगले सत्र में इसे शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

डा. पीपी ध्यानी, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि बादशाहीथौल टिहरी गढ़वाल

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प्रशासनिक अधिकारियों की कमी से अटके काम: श्रीदेव सुमन विवि में फिलहाल कुलपति और परीक्षा नियंत्रक की स्थायी नियुक्ति है। विवि में सबसे अहम कुलसचिव के पद पर कोई भी नियुक्ति नहीं है। परीक्षा नियंत्रक से ही कुलसचिव का कार्य करवाया जा रहा है। विवि में मौजूदा वक्त में कुलसचिव, सहायक कुलसचिव और उप कुलसचिव, वित्त अधिकारी के पद व्यवस्था पर चल रहे हैं। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रतिनियुक्ति पर आए हैं, लेकिन उन्हें ही कुलसचिव का चार्ज भी दिया गया है। इससे विवि के काम प्रभावित हो रहे हैं। इसी तरह वरिष्ठ कोषाधिकारी को विवि के वित्त अधिकारी का चार्ज दिया गया है। विवि में मौजूदा वक्त में लगभग 90 कर्मचरियों की जरूरत है, लेकिन विवि उपनल और दैनिक श्रमिकों से काम चला रहा है। विवि में 55 उपनल और दैनिक श्रमिक कार्यरत हैं। विवि ने चार साल पहले 56 कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव शासन को दिया था, लेकिन उसपर भी शासन ने आज तक कोई कदम नहीं उठाया।

Edited By: Jagran