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नई टिहरी, अनुराग उनियाल। देश के सबसे लंबे सस्पेंशन डोबरा-चांटी पुल पर अगले साल से वाहन फर्राटा भरते नजर आएंगे। 440 मीटर लंबे स्पान वाले इस पुल की विशेषता तापमान के हिसाब से इसका हर दिन फैलना-सिकुड़ना है। पुल 90 सेंटीमीटर तक दोनों कोनों में फैलेगा और सिकुड़ेगा भी। पुल में होने वाली इस हलचल के लिए इस पर अब सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं। इसके लिए पुल पर विंड शू, लिंक शू और मॉड्यूलर एक्सपेंशन ज्वाइंट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। ताकि पुल में होनी वाली हलचल का उस पर कोई असर न हो।

दक्षिण कोरिया की तकनीक पर बनाए जा रहे डोबरा-चांटी पुल पर अब फाइनल फिनिशिंग का काम शुरू हो गया है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार तापमान के हिसाब से इस पुल की लंबाई में 90 सेंटीमीटर तक का उतार-चढ़ाव आएगा। ऐसे में पुल पर होने वाली इस हलचल के लिए सुरक्षा उपाय भी किए जा रहे हैं। पुल के दोनों सिरों पर मॉड्यूलर एक्सपेंशन ज्वाइंट लगाए जाएंगे, जो पुल के इधर-उधर होने पर उसे सुरक्षा देंगे।

डोबरा में हवा की रफ्तार भी तेज होती है। खासकर गर्मियों में यहां पर 70 से सौ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती है। जिसे सहने के लिए पुल पर आठ शॉक ऑब्जर्वर लगाए जाएंगे। हालांकि, पुल की क्षमता 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवा को सहने की है। इसके अलावा पुल को कसने के लिए दो लाख से ज्यादा नट-बोल्ट भी लगाए जाएंगे। मार्च 2020 तक पुल पर आवागमन शुरू हो जाएगा।

पुल पर ये होंगे सुरक्षा उपाय

  • तेज हवा का दबाव झेलने के लिए शॉक ऑब्जर्वर
  • मॉड्यूलर एक्सपेंशन ज्वाइंट
  • दो लाख से ज्यादा नट-बोल्ट
  • दोनों किनारों पर रेलिंग

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केएस असवाल (प्रोजेक्ट इंजीनियर, डोबरा-चांटी पुल) का कहना है कि लोहा गर्मी में फैलता है और कम तापमान में सिकुड़ता है। इस प्रकृति के कारण डोबरा-चांटी पुल भी 90 सेंटीमीटर तक घटेगा-बढ़ेगा। हालांकि, इससे पुल की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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Posted By: Sunil Negi

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