उत्तराखंड के आईएएस अफसर की गजब की फिटनेस, 50 साल की उम्र में लगाई 51 किमी की दौड़
अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी ने अपने 50वें जन्मदिन पर नई टिहरी से मां कुंजापुरी मंदिर तक 51 किलोमीटर की दौड़ पूरी की।

जन्मदिन पर 51 किमी दौड़कर मां कुंजापुरी मंदिर पहुंचे अपर जिलाधिकारी.

समय कम है?
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संवाद सहयोगी, नई टिहरी। जीवन के 50 वर्ष पूरे होने और 51वें वर्ष में प्रवेश को टिहरी जिले के अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी ने अनूठे अंदाज में मनाया। उन्होंने शुक्रवार सुबह जिला मुख्यालय नई टिहरी से मां कुंजापुरी मंदिर तक करीब 51 किलोमीटर की अनूठी यात्रा की।
सुबह साढ़े छह बजे दौड़ते हुए शुरू हुई यह यात्रा दोपहर साढ़े तीन बजे मंदिर पहुंचकर पूरी हुई। अपनी इस अनूठी यात्रा में उन्होंने कहीं दौड़ लगाई तो कुछ स्थानों पर पैदल दूरी तय की।
उन्होंने इस यात्रा को फिट इंडिया चैलेंज से जोड़ने के लिए पंजीकरण भी कराया है। साथ ही संदेश दिया कि नियमित व्यायाम और शारीरिक श्रम को जीवन का हिस्सा बनाकर ही बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।
जिलेभर में चर्चा का विषय
जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए लोग कुछ न कुछ नया करने की सोचते हैं। लेकिन टिहरी के अपर जिलाधिकारी ने कुछ ऐसा किया कि जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने बताया कि पहाड़ में बचपन से खेतों में काम करने, पैदल चलने और खेलकूद में भाग लेने से शारीरिक सक्रियता की आदत बनी। वर्तमान में भी वह प्रतिदिन छह से सात किलोमीटर दौड़ते हैं।
जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए उन्होंने 51 किलोमीटर की दूरी तय कर मां कुंजापुरी के दर्शन करने का संकल्प लिया। इस यात्रा को फिट इंडिया चैलेंज से जोड़ने के लिए पंजीकरण भी कराया। यात्रा के दौरान उन्होंने चंबा में प्रथम विश्वयुद्ध के वीर सैनिक विक्टोरिया क्रास विजेता राइफलमैन गब्बर सिंह नेगी के स्मारक पर पुष्प अर्पित किए।
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खाड़ी में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीद रवींद्र सिंह रावत और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के स्मारक पर भी श्रद्धांजलि दी। जड़धारगांव के प्रवेश द्वार पर रुककर बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी के योगदान का स्मरण किया।
चंबा से आगराखाल और हिंडोलाखाल तक की यात्रा में उन्होंने हेंवल घाटी के ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी, स्वरोजगार, वन गुर्जरों के मौसमी प्रवास और सड़क सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को करीब से देखा। इस दौरान 20 से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत और झरने भी दिखाई दिए। उन्होंने इनके संरक्षण और स्वच्छता की आवश्यकता महसूस की।
दोपहर की तेज धूप और लगातार चढ़ाई के कारण यात्रा का अंतिम हिस्सा काफी चुनौतीपूर्ण रहा। पैरों में दर्द और थकान के बावजूद वह आगे बढ़ते रहे। मंदिर पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़ते समय उन्हें कई बार विश्राम करना पड़ा। अंततः मां कुंजापुरी के दर्शन कर उन्होंने आशीर्वाद प्राप्त किया।
