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जब समाज ने कहा- ‘शराब नहीं, संस्कार दीजिए’; टिहरी में सुशील बहुगुणा लोगों को कर रहे नशामुक्त

Published: Wed, 12 Aug 2026 06:13 PM (IST)

टिहरी जिले में सुशील बहुगुणा और उनकी संस्था 'ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति' ने 'शराब नहीं, संस्कार दीजिए' अभियान से समाज को नशामुक्त किया है।

‘शराब नहीं, संस्कार दीजिए’ अभियान के लिए एनजीओ सम्मेलन में सुशील बहुगुणा को सम्मानित करते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट।

‘शराब नहीं, संस्कार दीजिए’ अभियान के लिए एनजीओ सम्मेलन में सुशील बहुगुणा को सम्मानित करते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट। 

रजत प्रताप सिंह, नई टिहरी। नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल इलाज के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए तो समाज जब स्वयं आगे आता है, तभी स्थायी परिवर्तन की राह खुलती है। उत्तराखंड के टिहरी जिले में शुरू हुआ ‘शराब नहीं, संस्कार दीजिए’ अभियान इसका सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है।

वर्षों ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करते हुए जब सामाजिक कार्यकर्ता सुशील बहुगुणा व उनकी संस्था ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति (राड्स) को अनुभव हुआ कि शराब व्यक्ति ही नहीं, परिवार और समाज को भी प्रभावित कर रही है, तो 14 अक्टूबर, 2014 को उन्होंने इस जनांदोलन की शुरुआत की। अभियान के तहत पिछले 12 साल में जिले में तीन लाख से ज्यादा लोग नशा नहीं करने का संकल्प ले चुके हैं। 

मुख्य बिंदु

  • 12 साल में जिले में तीन लाख से ज्यादा लोग ले चुके हैं नशा न करने का संकल्प
  • 500 से अधिक ग्राम पंचायतें जिले में नशामुक्त हो चुकी हैं,
  • 180 से अधिक शराबमुक्त विवाह अभियान की प्रेरणा से संपन्न हुए
  • 200 से अधिक विद्यालयों में 5,000 से अधिक युवा नशा न करने की शपथ ले चुके 

अभियान के तहत ग्राम पंचायत, विद्यालय-महाविद्यालय, महिला मंगल दल, युवा समूह और स्वयं सेवी संगठनों के सहयोग से लगातार जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। सार्वजनिक सभा, शपथ ग्रहण समारोह, रैली, संवाद बैठक और विभिन्न सामाजिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया।

अभियान का दायरा बढ़ने लगा और अब तक लगभग तीन लाख लोग नशा न करने का संकल्प ले चुके हैं। जिले की 500 से अधिक ग्राम पंचायतें नशामुक्त हो चुकी हैं, जबकि 180 से अधिक शराबमुक्त विवाह इस अभियान की प्रेरणा से संपन्न हुए। 

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इसी कड़ी में टिहरी जिले के 200 से अधिक विद्यालयों में 5,000 से अधिक युवाओं को नशा न करने की शपथ दिलाई गई। उन्हें हनुमान चालीसा बांटी गई, जिससे उनमें आध्यात्मिक और नैतिक जागरूकता को भी बल मिला।

कई ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पारित कर अपने क्षेत्र में शराब के विरुद्ध सामाजिक नियम लागू किए। साथ ही इसके प्रभावी क्रियान्वयन को ग्राम सुधार समितियों का गठन किया गया। 

जनभागीदारी आधारित सम्मान परंपरा

अभियान की एक अनूठी विशेषता जनभागीदारी आधारित सम्मान परंपरा है। जो परिवार अपने बच्चों के विवाह को पूरी तरह काकटेल व शराबमुक्त रखते हैं, उन्हें अभियान के प्रणेता सुशील बहुगुणा की ओर से ‘शराब नहीं, संस्कार दीजिए’ प्रशस्ति-पत्र देकर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाता है। आज यही सम्मान समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं प्रेरणा का माध्यम बन गया है और अनेक परिवार स्वेच्छा से नशामुक्त विवाह का संकल्प ले रहे हैं। 

2024 में मिला राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान

अभियान का ही असर है कि नगर पालिका परिषद नई टिहरी ने भी शराबमुक्त विवाह को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया। यह इस जनआंदोलन की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

सामाजिक कार्यकर्ता सुशील बहुगुणा बताते हैं कि मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव की प्रशंसा, जिला प्रशासन का प्रशस्ति पत्र, नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ा प्रमाणपत्र और अन्य सामाजिक सम्मान इस पहल की विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान से भी इस कार्य को पहचान मिली। 

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लगातार जनसंवाद से प्रभावी बदलाव संभव

अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय, परिवार, ग्राम पंचायत, स्वयंसेवी संस्था और युवा संगठन नियमित रूप से नशामुक्ति के लिए जनसंवाद करते रहें तो समाज में प्रभावी बदलाव संभव है।

उनका भरोसा है कि नशे के विरुद्ध सबसे बड़ा हथियार कानून नहीं, बल्कि जागरूक, संगठित और सहभागी समाज है। अभियान यह संदेश देता है कि जब समाज स्वयं जिम्मेदारी उठाता है, तो परिवर्तन केवल नारों में नहीं, बल्कि परिवारों के जीवन, सामाजिक व्यवहार और आने वाली पीढ़ियों के संस्कारों में भी दिखाई देता है।

‘शराब नहीं, संस्कार दीजिए’ अभियान से क्षेत्र के अनेक गांवों में सामाजिक चेतना का वातावरण बना है और नशे के विरुद्ध सामुदायिक सहभागिता को मजबूती मिली है।

-माला राज्य लक्ष्मी शाह, सांसद, टिहरी गढ़वाल