उत्तराखंड का टिहरी लाया बड़ा बदलाव, समाज से उठी एक आवाज 'शराब नहीं, संस्कार दीजिए'
उत्तराखंड के टिहरी में 'शराब नहीं, संस्कार दीजिए' अभियान ने 2014 से समाज में बड़ा बदलाव लाया है।

उत्तराखंड के टिहरी जिले में 'शराब नहीं, संस्कार दीजिए' अभियान।

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जागरण संवाददाता, नई टिहरी। नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल इलाज के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए तो समाज जब स्वयं आगे आता है, तभी स्थायी परिवर्तन की राह खुलती है। उत्तराखंड के टिहरी जिले में शुरू हुआ 'शराब नहीं, संस्कार दीजिए' अभियान इसका उदाहरण है।
वर्षों ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करते हुए, जब सामाजिक कार्यकर्ता सुशील बहुगुणा व उनकी संस्था ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति को अनुभव हुआ कि शराब व्यक्ति ही नहीं, परिवार और समाज को भी प्रभावित कर रही हैं। 14 अक्टूबर, 2014 को उन्होंने इस जनांदोलन की शुरुआत की। अभियान के तहत पिछले 12 साल में कई नशे के विरुद्ध युद्ध लोग नशा नहीं करने का संकल्प ले चुके हैं।
लगातार जनजागरण कार्यक्रम
अभियान के तहत ग्राम पंचायत सहयोग से लगातार जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। सार्वजनिक सभा, शपथ ग्रहण समारोह, रैली, संवाद बैठक और विभिन्न सामाजिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। अभियान का दायरा बढ़ने लगा और अब तक जिले में तीन लाख से ज्यादा लोग नशा न करने का संकल्प ले चुके हैं। 500 से अधिक ग्राम पंचायतें नशामुक्त हो चुकी हैं, जबकि 180 से अधिक शराब मुक्त विवाह इस अभियान की प्रेरणा से संपन्न हुए।
इसी कड़ी में दो सौ से अधिक विद्यालयों में पांच हजार से अधिक युवाओं को नशा न करने की शपथ दिलाई गई। उन्हें हनुमान चालीसा बांटी गई, जिससे उनमें आध्यात्मिक और नैतिक जागरुकता को भी बल मिला। कई ग्राम पंचायतों ने क्षेत्र में शराब के विरुद्ध सामाजिक नियम लागू किया है।
लगातार जनसंवाद से ही प्रभावी बदलाव संभव
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय, परिवार, ग्राम पंचायत, स्वयसेवी संस्था और युवा संगठन नियमित रूप से नशामुक्ति के लिए जनसंवाद करते रहें तो समाज में प्रभावी बदलाव संभव है। उनका भरोसा है कि नशे के विरुद्ध सबसे बड़ा हथियार कानून नहीं, जागरूक समाज है। अभियान यह संदेश देता है कि जय समाज स्वयं जिम्मेदारी उठाता है, तो परिवर्तन नारों में नहीं, परिवारों के जीवन, सामाजिक व्यवहार व आने वाली पीढियों के सस्कारों में भी दिखाई देता है।
नशामुक्त समारोह का संकल्प
अभियान की एक अनूठी विशेषता जनभागीदारी आधारित सम्मान परंपरा है। जो परिवार अपने बच्चों के विवाह को पूरी तरह शराब मुक्त रखते हैं, उन्हें अभियान के प्रणेता सुशील बहुगुणा की ओर से 'शराब नहीं, संस्कार दीजिए' प्रशस्ति पत्र देकर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाता है। आज यही सम्मान समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं प्रेरणा का माध्यम बन गया है और अनेका परिवार स्वेच्छा से नशामुक्त विवाह का संकल्प ले रहे हैं।
2024 में मिला राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान
अभियान का ही असर है कि नगर पालिका परिषद नई टिहरी ने भी शराबमुफ्त विवाह समारोह को प्रेत्साहित करने का निर्णय लिया। सुशील बहुगुणा बताते हैं कि मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को प्रशंसा, जिला प्रशासन का प्रशस्ति पत्र, नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ा प्रमाणपत्र और राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान मिला है।
