संवाद सूत्र, कंडीसौड़: आलवेदर रोड से प्रभावित दुकानदारों के लिए विस्थापन की व्यवस्था व विस्थापन भत्ता नहीं दिए जाने के कारण इनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। यह दुकानदार किराये पर वर्षों से दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।

आलवेदर रोड से थौलधार विकासखंड क्षेत्रांतर्गत कंडीसौड़, उनियाल गांव, कमांद, काण्डीखाल, रतनौ, सांकरी, कुनेर, रामगढ़, बौर, किरगणी,अलेरू, किल्याखाल, सुनारगांव, जसपुर आदि कस्बों व गांवों के करीब पांच दर्जन व्यापारी प्रभावित हुए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि ऑलवेदर रोड की जद में आ गई दुकानों को बीआरओ ने एक वर्ष पूर्व खाली करा कर ध्वस्त कर दिया था। भवन स्वामियों को तो मुआवजा दे दिया, लेकिन किराये पर दुकान चला रहे दुकानदारों के विस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है और न ही कोई विस्थापन भत्ता दिया गया। प्रभावितों का कहना है कि वह डीएम, एडीएम और स्थानीय प्रशासन से भी फरियाद लगा चुके है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। कांडीखाल के व्यापारी बुद्धि सिंह रावत का कहना है कि वह वर्षों से यहां पर दुकान चला रहे थे, लेकिन अब वे बेरोजगार घूम रहे हैं। उनका ढाई दशक पुराना व्यापार चौपट हो गया है। व्यापारियों को पुरानी टिहरी की तर्ज पर विस्थापन करने एवं विस्थापन भत्ता दिया जाना चाहिए। बीआरओ का कहना है कि व्यापारियों के विस्थापन एवं विस्थापन भत्ता दिए जाने का प्रविधान नहीं है। व्यापारी सुमन गुसाई, अतोल सिंह, सुरेश खंडूड़ी, प्रेम सिंह भंडारी और रणवीर थलवाल आदि ने मांग है कि शीघ्र प्रभावित दुकानदारों के विस्थापन की व्यवस्था की जाए। जब तक दुकानदारों का विस्थापन नहीं होता है, तब तक बीस हजार रुपये मासिक प्रतिपूर्ति भत्ता दिया जाए। प्रभारी नायब तहसीलदार जीपी पेटवाल का कहना है कि दुकानदारों के लिए अभी तक ऐसा प्रावधान नहीं है। यदि कोई आदेश आएगा तो आगे की कार्यवाही की जाएगी।

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