नई टिहरी, जेएनएन। जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने पत्नी की हत्या के दोषी को आजीवन सश्रम कारावास व 45 हजार रुपये की अर्थदंड की सजा सुनाई। 

अभियोजना पक्ष के मुताबिक थाना थत्यूड़ के अंतर्गत ग्राम अलमस निवासी राजपाल पुंडीर पुत्र दयाल सिंह ने 7 अक्टूबर 2015 को सुबह करीब साढे़ नौ बजे अपनी पत्नी संगीता को फोन कर उसकी नौकरी लगाने के बहाने उसे मसूरी बुलाया। उसने पत्नी से कहा कि घरवालों को यह बताना कि वह धनोल्टी जा रही है। साथ ही बेटी को घर पर छोड़ने को कहा। 

आरोप है कि संगीता पति के कहने पर मसूरी गई, लेकिन मसूरी जाने के बारे में संगीता ने अपनी बहन मुन्नी देवी को बता दिया। उसने बताया कि उसे पति ने मसूरी बुलाया है। 

उसके बाद राजपाल अपनी पत्नी को देहरादून ले गया और रायपुर के जंगल में ले जाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद राजपाल अपनी बहनोई के घर गढी कैंट चला गया। जब संगीता घर नहीं पहुंची तो राजपाल के जीजा ने आठ  अक्टूबर 2015 को राजपाल को लेकर ग्राम अलमस आए और संगीता के गायब होने की सूचना संगीता के पिता अमीचंद को दी। 

गांव के लोगों और संगीता के मायके वालों के साथ राजपाल संगीता को ढूंढने का नाटक करने लगा। इस बीच संगीता की बहन मुन्नी देवी ने खुलासा किया कि राजपाल ने ही तो संगीता को मसूरी बुलाया था। 

जब राजपाल को लगा कि पुलिस उससे पूछताछ करने वाली है तो वह मसूरी से गांव के लोगों और मायके वालों को चकमा देकर भाग गया। 27 अक्टूबर 2015 को थत्यूड़ पुलिस उसे दिल्ली से पकड़ कर लाई और उसकी निशानदेही पर मृतका संगीता का कंकाल बरामद किया। 

इसकी पुष्टि संगीता के डीएनए का माता-पिता के डीएनए से मिलान कर की गई। इसके बाद मामला न्यायालय में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी वीरेंद्र सिंह रावत ने पैरवी की। 

इस मामले में 17 गवाह न्यायालय में पेश किए गए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला जल एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अभियुक्त को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 45 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।

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