अनुराग उनियाल, नई टिहरी

डोबरा- चांठी पुल के एंकर ब्लॉक में पड़ी दरारें भविष्य में कभी भी बड़ा खतरा बन सकती हैं। दिल्ली से आई सीआरआरआइ की टीम की जांच में सामने आया है कि डोबरा-चांठी पुल के दोनों एंकर ब्लॉक में दरारें पड़ी हैं। इसमें पानी रिस रहा है और एंकर ब्लॉक की क्षमता को कम कर रहा है। ऐसे में इसका ट्रीटमेंट किया जाना जरूरी है।

पिछले साल 23 अगस्त को टिहरी झील के ऊपर बन रहे डोबरा पुल के तीन सस्पेंडर अचानक टूट गए थे और पुल का काम बंद कर दिया था। उस हादसे से सबक लेते हुए लोनिवि ने पुल के दोनों सिरों पर बने वर्ष 2008 में बनाए गए एंकर ब्लॉक (पुल के दोनों सिरों पर बने पुल का वजन झेलने वाले पिलर) की जांच कराने का भी फैसला किया और दिल्ली स्थित सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआइ) की टीम को जांच के लिए बुलाया। बीते 15 मार्च को भी केंद्रीय टीम ने पुल की जांच की और अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुल के एंकर ब्लॉक में पड़ी दरारों से पानी रिस कर एंकर ब्लॉक के अंदर जा रहा है, जो उसकी क्षमता को कम कर रहा है। टीम की रिपोर्ट के बाद लोनिवि पुल निर्माण में कोई रिस्क नहीं उठाना चाहता। केंद्रीय टीम अब लोनिवि को एंकर ब्लॉक के ट्रीटमेंट का प्लान देगी जिसके बाद एंकर ब्लॉक की मरम्मत का काम भी शुरू होगा। सीआरआरआइ की टीम ने एंकर ब्लॉक की जांच के बाद उसके ऊपर पड़ी दरारों के ट्रीटमेंट की बात कही है। उनके निर्देशानुसार जल्द ही ट्रीटमेंट का काम शुरु कराया जाएगा।

केएस असवाल, अधिशासी अभियंता लोनिवि रुका है पुल का काम

डोबरा - चांटी पुल का निर्माण 2006 में शुरू हुआ था और वर्ष 2010 में डिजायन फेल होने के कारण बंद हो गया। तब तक पुल निर्माण पर एक अरब 35 करोड़ रुपये खर्च कर दिया गया था। उसके बाद लोनिवि निर्माण खंड ने वर्ष 2016 में दोबारा पुल का निर्माण डेढ़ अरब की लागत से शुरू किया गया। पुल के लिए दक्षिण कोरिया की कंपनी योसीन से नया डिजायन बनाने के बाद काम तेजी से चल रहा था लेकिन पिछले साल 23 अगस्त को पुल के चांटी एबेडमेंट की तरफ लगाए जा रहे तीन सस्पेंडर (पुल के बेस को लटकाने वाले लोहे के रस्से) अचानक टूट गए और पुल का निर्माणधीन हिस्सा टेढ़ा हो गया। इसके बाद अगस्त से अभी तक पुल का काम रुका है। इन दिनों पुल के सस्पेंडर की सॉकेटिग दोबारा से की जा रही है। 1800 सस्पेंडर में से 1193 की शॉकेटिग की जा चुकी है।

Posted By: Jagran