जागरण संवाददाता, नई टिहरी: टिहरी झील का जलस्तर बढ़ने से एक तरफ जहां टीएचडीसी प्रबंधन ज्यादा बिजली उत्पादन कर पा रहा है, वहीं झील से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत है। नंदगांव समेत अन्य क्षेत्रों में झील किनारे लगाई ग्रामीणों की फसलें भी पानी में डूब गई हैं। ग्रामीणों ने जल्द ही विस्थापन न किए जाने पर आंदोलन का एलान किया है।

बुधवार को नंदगांव में आंशिक डूब क्षेत्र संघर्ष समिति की बैठक में समिति के अध्यक्ष सेाहन सिंह राणा ने कहा कि झील का जलस्तर बढ़ने से आबादी क्षेत्रों के पास झील का पानी पहुंचने से भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। सरकार की मनमानी से ग्रामीणों को जान-माल का नुकसान हो सकता है। 828 मीटर तक पानी जाने पर भी भूस्खलन की समस्या होती थी, लेकिन अब जलस्तर 829 मीटर हो गया है। जल्द ही सभी ग्रामीणों की सहमति के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। सरकार ने बिना ग्रामीणों का विस्थापन किए ही झील का जलस्तर बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इससे अब मकानों में भी धसाव का खतरा हो गया है। पानी बढ़ने से ग्रामीण भरोसी देवी, उम्मेद सिंह, प्रताप सिंह आदि ग्रामीणेों की फसलें और पेड़ भी डूब गए हैं। यहां तक कि मवेशियों के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। बैठक में मंजू देवी, रुक्मिणी देवी, शाखा देवी, शैला देवी, बीरा देवी, मानवेंद्र सिंह, राम सिंह आदि मौजूद रहे।

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शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। फिलहाल झील का पानी बढ़ने से पैदा हो रहे हालात पर नजर रखी जा रही है। तंत्र अलर्ट मोड पर है। शासन से निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इवा आशीष श्रीवास्तव, जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल

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