संवाद सूत्र, देवप्रयाग: एनएचपीसी की भागीरथी व अलकनंदा नदी में प्रस्तावित कोटलीभेल बांध परियोजना स्थलों का केंद्रीय निगरानी टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने बांधों की डिजाइन व पर्यावरणीय प्रभाव को विशेष तौर पर परखा गया।

देवप्रयाग क्षेत्र में वर्ष 2005 से एनएचपीसी की भागीरथी में चरण एक-ए 195 मेगावाट व अलकनंदा में एक -बी 320 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना प्रस्तावित है। केंद्र व राज्य सरकार की ओर से भागीरथी में प्रस्तावित चरण एक-ए मुनेठ बांध परियोजना को सभी स्वीकृतियां दी जा चुकी है। अलकनंदा में बनने वाली चरण एक बी में पर्यावरण स्वीकृति होनी बाकी है। दिल्ली स्थित केंद्रीय जलायोग के चीफ इंजीनियर टीके शिवराजन व केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण चीफ इंजीनियर पीके शुक्ला की टीम ने बांध निर्माण स्थलों का भौतिक निरीक्षण किया। टीम ने डिजाइन व पर्यावरण की ²ष्टि से बांधों की अनुकूलता को विशेष तौर पर परखा गया। कोटलीभेल बांध परियोजना महाप्रबंधक सतीश कुमार चौहान ने टीम को सभी संबंधित जानकारियां उपलब्ध करायी। एनएचपीसी मुख्यालय फरीदाबाद के महाप्रबंधक (डिजाइन) विवेक द्विवेदी उपप्रबंधक (पर्यावरण) आशीष दास ने टीम को सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। मुनेठ ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह व पूर्व प्रधान दिगम्बर सिंह ने केंद्रीय टीम से क्षेत्रीय जनता की ओर से बांध का निर्माण शीघ्र शुरू किए जाने की मांग की। 2013 की आपदा के बाद केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की 24 परियोजनाओं पर रोक लगा दी थी। परीक्षण के बाद केंद्र सरकार द्वारा जिन छह परियोजनाओं को सभी ²ष्टियों से उपयुक्त पाया गया उनमें एनएचपीसी की देवप्रयाग क्षेत्र में प्रस्तावित दोनों बांध परियोजना भी शामिल है। केंद्रीय टीम द्वारा जल्दी ही अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जाएगा। पिछले 14 वर्षों से बांध परियोजना निर्माण की बाट जोह रही क्षेत्रीय जनता को केंद्रीय टीम के दौरे के बाद शीघ्र बांध निर्माण शुरू होने की आशा है।

Posted By: Jagran

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