संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग: सड़क, शिक्षा, दूरसंचार समेत 11 बुनियादी समस्याओं को लेकर मध्यमहेश्वर घाटी के ग्रामीणों का क्रमिक अनशन चौथे दिन भी जारी रहा। चेतावनी दी कि गई यदि उनकी समस्याओं पर शीघ्र कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो 28 जनवरी से ग्रामीणों को आमरण अनशन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। ग्रामीणों की प्रशासन व संबंधित विभागों के साथ बुधवार को वार्ता हुई थी, जो विफल रही।

मदमहेश्वर घाटी विकास मंच एवं मनसूना न्याय पंचायत के प्रधान संगठन के संयुक्त तत्वावधान में 21 जनवरी से मध्यमहेश्वर घाटी के 13 ग्राम पंचायतों ने प्रदर्शन के बाद तहसील प्रांगण ऊखीमठ में क्रमिक अनशन शुरू किया था। यह लोग सड़क, शिक्षा एवं दूरसंचार समेत कई विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की।

गुरुवार चौथे दिन न्याय पंचायत मनसूना के ग्राम पंचायत राऊलैंक एवं बुरूबा के ग्रामीणों का अनशन जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो, 28 जनवरी को राष्ट्रीय राजमार्ग में चक्का जाम के बाद आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। वहीं, बुधवार को आंदोलनकारियों ने उपजिलाधिकारी व पीएमजीएसवाइ, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत, लोनिवि, दूरसंचार के अधिकारियों से विभिन्न मांगों को लेकर वार्ता की थी। सभी मांगों पर सहमति न बनने पर वार्ता विफल रही। पीएमजीएसवाइ व बीएसएनएल से कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की तथा आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया। गुरुवार को मध्यमहेश्वर घाटी विकास मंच अध्यक्ष मदन भट्ट, न्याय पंचायत प्रधान संगठन अध्यक्ष मदन बत्र्वाल, बुरूबा के जीतपाल ¨सह, उदय प्रकाश, अनिल बुरियाल, राऊलैंक बलराम आर्य, प्रेम लाल, रमेश लाल, राजेंद्र ¨सह समेत कई ग्रामीण उपस्थित थे। वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के ब्लाक संगठन समेत जिपंस मीना पुंडीर, जिपंस राजाराम सेमवाल समेत कई ब्लाक के जनप्रतिनिधियों ने अपना समर्थन दिया है।

Posted By: Jagran