रुद्रप्रयाग, बृजेश भट्ट। केदारनाथ में हुई जोरदार बर्फबारी के कारण इस बार यात्रियों को बाबा के दर्शनों के लिए तीन से चार किमी का सफर बर्फ के ऊपर पैदल चलकर तय करना पड़ेगा। हालांकि, प्रशासन पूरी तैयारी कर रहा है कि यात्रा से पूर्व पैदल मार्ग से बर्फ हटा ली जाए। बावजूद इसके लगता नहीं कि नौ फीट मोटी बर्फ की चादर को हटा पाना आसान होगा। जाहिर है इस स्थिति में यात्रा शुरू होने पर बर्फ के ऊपर ही टेंट लगाने पड़ेंगे। इनमें यात्रियों के लिए खाने-ठहरने की सुविधा उपलब्ध होगी। 

इस बार हुई भारी बर्फबारी का असर आगामी नौ मई से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा पर पड़ना तय है। मार्च आधा बीत चुका है, लेकिन धाम में अब भी बर्फबारी का सिलसिला जारी है। जैसा मौसम का मिजाज है, इसके आगे भी जारी रहने की संभावना है। 

यही वजह है कि केदारपुरी को हर तरफ बर्फ की लगभग नौ फीट मोटी चादर ने ढका हुआ है। जिन स्थानों पर हिमस्खलन हुआ है, वहां तो दस फीट से भी अधिक बर्फ जमी है। 

बीते पांच वर्षो से केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य देख रहे निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) के पूर्व मीडिया प्रभारी एवं वर्तमान में वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रभारी मनोज सेमवाल कहते हैं कि इस बार भी मई में यात्रियों को बर्फ के ऊपर से ही गुजरना पड़ेगा। वर्ष 2014 में भी यात्रियों को इन्हीं परिस्थितियों से रू-ब-रू होना पड़ा था। कहते हैं, बर्फ के ऊपर चलने में परेशानी जरूर होती है, लेकिन इससे एक अलग ही तरह का अनुभव भी यात्रियों को होगा।

स्थानीय युवा करेंगे अतिरिक्त टेंट की व्यवस्था 

केदारनाथ में यात्रियों के रहने के लिए जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम) के कॉटेज व टेंट के साथ तीर्थपुरोहितों के आवास भी हैं। यात्रियों  लिए रहने की समुचित व्यवस्था हो, इस दृष्टि से प्रशासन अतिरिक्त टेंट की भी व्यवस्था करता है। 

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि इस बार भी 200 स्थानीय युवाओं को केदारनाथ के अलावा लिनचोली में टेंट लगाने की अनुमति दी जा रही है। ताकि यात्रियों की आमद बढ़ने पर उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़े।

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