संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग : चारधाम परियोजना के तहत 76 किलोमीटर लंबे गौरीकुंड हाईवे पर एक दर्जन से अधिक स्लाइडिंग जोन विकसित हुए हैं। बारिश होने पर पूरे हाईवे में पहाड़ी से पत्थर गिरने का सिलसिला बना रहता है। इससे इस पर गुजरने वाले वाहनों को हर समय खतरा बना रहता है। पिछले तीन वर्ष में अब तक 21 व्यक्तियों ने इस राजमार्ग पर जान गंवाई है, जबकि चार दर्जन वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं बदरीनाथ हाईवे पर जिले के अंतर्गत दो स्लाइडिंग जोन हैं, जिसमें एक नरकोटा हाल में सक्रिय हुआ है, जबकि सिरोबगड़ अस्सी के दशक से पूरे क्षेत्र के लिए नासूर बना है।

गौरीकुंड हाईवे पर डेंजर जोन के ट्रीटमेंट करने की बात पिछले एक वर्ष से अधिक समय से कही जा रही है, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। इन दिनों बरसात के सीजन में यह हाईवे खतरनाक बन गया है। यह हाईवे केदारनाथ यात्रा के साथ ही पूरी केदारघाटी की लगभग एक लाख आबादी के लिए लाइफ लाइन है। रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग के बीच रामपुर, नारायणकोटी, सिल्ली, सौड़ी, चन्द्रापुरी, गबनी गांव, बांसवाड़ा, भीरी, मुनकटिया, बडासू, चंडिकाधार, सेमी और डोलिया मंदिर डेंजर जोन हैं। हाइवे पर लगातार भूस्खलन से पिछले ढ़ाई वर्षो में अब तक कई दर्दनाक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद भी सरकार सुध नहीं ले रही है। गत वर्ष अप्रैल महीने में ऊखीमठ मीटिग लेने आए राज्यमंत्री धनसिंह के वाहन पर भी पहाड़ी से पत्थर गिर गया था, इस दुर्घटना में मंत्री तो बाल-बाल बच गए, लेकिन वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। पिछले तीन वर्ष में चार दर्जन से अधिक वाहन अब तक क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। गौरीकुंड हाईवे पर अब तक हुई बड़ी दुर्घटनाएं

-21 दिसंबर 2018 को बांसवाड़ा के पास पहाड़ी से मलबा आने से 9 मजदूर जिदा दफन

-20 अक्टूबर 2019 को फाटा के पास मलबा आने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत

-4 मार्च 2020 को नारायणकोटी के पास दुर्घटना में दो की मौत

-31 जुलाई 2020 को संगम बाजार में पत्थर गिरने से बाइक सवार की मौत

-3 अगस्त 2020 को बांसवाड़ा के पास हाइवे पर पत्थर गिरने से एक युवक की मौत डेंजर जोन का सर्वे हो चुका है। डीपीआर तैयार हो रही है। स्वीकृति मिलने के बाद ही स्लाइडिंग जोन का ट्रीटमेंट कार्य किया जाएगा।

अनिल बिष्ट, अधिशासी अभियंता, नेशनल हाईवे गौरीकुंड, रुद्रप्रयाग

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