संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग: जिले में पार्वो वायरस की चपेट में करीब 50 फीसद पालतू कुत्ते आ चुके हैं। बीमारी के कारण पशु चिकित्सालयों में कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीमारी से निपटने के लिए पशुपालन विभाग हरसंभव कोशिश में जुटे हुए हैं।

मौसम अनुकूल न होने के कारण पालतू कुत्ते भी पार्वो वायरस की चपेट में आ रहे हैं। रुद्रप्रयाग जिले में पचास फीसद कुत्ते इस बीमारी की चपेट में हैं और कुत्तों को खूनी पेचिस और उल्टी हो रही है। यह विषाणुजनित रोग मौसम परिवर्तन से फैलता है। जनपद के ऊखीमठ, फाटा, गुप्तकाशी, रामपुर, रुद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि, चंद्रापुरी, सुमाड़ी, चैरिया भरदार, जखोली, मुन्ना देवल, कांडई, दुर्गाधार, क्यूंजा के पशु केंद्रों में हर दिन 10 से 15 पालतू कुत्ते पार्वो बीमारी से ग्रसित आ रहे हैं। अब तक चिकित्सालयों में दो हजार से ज्यादा कुत्ते भर्ती हो चुके हैं। इनमें से कई कुत्तों की मौत पार्वो की चपेट में आने से हो चुकी है। पशु चिकित्सकों की मानें तो मौसम बदलने से कुत्तों में पार्वो वायरस का संक्रमण फैलने लगता है। जिन कुत्तों को पैदा होने के आधे महीने और डेढ़ महीने में पार्वो का टीका लगता है, उनमें यह बीमारी नहीं होती है। इसके साथ ही ढाई महीने में बूस्टर डोज लगाया जाता है।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश नितवाल ने बताया कि जिन कुत्तों का टीकाकरण होता है, वह तो इस बीमारी से बच जाते हैं, मगर जिनका टीकाकरण नहीं होता उन कुत्तों में वायरस तेजी से अटैक करता है। पार्वो वायरस कुत्तों की आंत में अवरोध पैदा करता है। इससे आंतों में संक्रमण हो जाता है।

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