संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग : सरकार भले ही रोजगारपरक शिक्षा देने की बात कहती है, लेकिन धरालत पर कुछ ओर ही नजर आ रहा है। जनपद के तीन औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चिरबटिया, बसुकेदार और अगस्त्यमुनि पर ताले लग चुके हैं। वहीं जनपद के अन्य प्रशिक्षण संस्थान भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं।

प्रदेश सरकार ने पहाड़ से पलायन रोकने और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को अपने क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराने के कवायद शुरू की थी, लेकिन सरकार की गलत नीतियों के चलते आइटीआइ संस्थान लगातार बंद हो रहे हैं। जो संचालित हो भी रहे हैं, वहां भी छात्र तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं। जनपद में अब तक तीन आइटीआइ पर ताले लटके चुके हैं। चिरबटिया में वर्ष 1989 में आइटीआइ की स्वीकृति मिली थी। वर्ष 1992 में इलेक्ट्रिशियन, वायरमैन व इलेक्ट्रिकल ट्रेड के साथ संस्थान का संचालन शुरू किया गया। तब अनुदेशक समेत कर्मचारियों के 14 पद भी सृजित किए गए थे। लेकिन 27 वर्षों में संस्थान को अपना भवन नहीं मिला। जबकि वर्षों पूर्व भवन निर्माण के लिए भूमि की खरीद हो चुकी थी। सितंबर 2018 में शासन द्वारा पहले यहां इलेक्ट्रिशियन व वायरमैन ट्रेड को बंद किया गया। फिर बीते वर्ष सितंबर में एकलौते ट्रेड इलेक्ट्रीकल को भी बंद कर आगामी सत्र के लिए आवेदन फार्म भी नहीं भेजे। साथ ही संस्थान के प्रभारी अनुदेशक समेत चार कार्मिकों को आइटीआइ रुद्रप्रयाग में शिफ्ट कर दिया गया है। दो चौकीदार अब भी चिरबटिया में तैनात हैं। 90 के दशक में संचालित अगस्त्यमुनि और बसुकेदार आइटीआइ को भी बंद कर दिया गया है। इनकी कहानी भी चिरबटिया जैसी है।

ग्राम पंचायत चिरबटिया के ग्राम प्रधान दिनेश कैंतुरा बताते हैं कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की पहले दिन से उपेक्षा की गई। अब, यहां ट्रेडों का संचालन नहीं हो रहा है, जिससे स्थानीय के साथ टिहरी जनपद के नैलचामी के युवाओं को भी अन्यत्र दौड़ लगानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से संस्थान का संचालन शुरू करने की मांग की है। वहीं जनपद में संचालित रुद्रप्रयाग संस्थान में भी छात्रों को समुचित सुविधाओं का अभाव हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रोजगारपरक शिक्षा के प्रति सरकार कितनी गंभीर है। शासन व निदेशालय स्तर पर सितंबर 2019 में इलेक्ट्रिशियन ट्रेड को बंद कर आवेदन फार्म नहीं भेजे गए थे। पत्राचार भी किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिला। चार कर्मचारियों को आइटीआइ रुद्रप्रयाग में शिफ्ट किया गया है।

गजेंद्र सिंह चौहान, प्रभारी प्राचार्य आइटीआइ चिरबटिया

Posted By: Jagran

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