रुद्रप्रयाग, जेएनएन। उत्तरकाशी जिले के आपदा प्रभावित आराकोट क्षेत्र में राहत बांटने के दौरान हेली दुर्घटना के शिकार हुए जांबाज पायलट ले.कर्नल (सेवानिवृत्त) रंजीव लाल ने वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा रेस्क्यू व केदारनाथ पुनर्निर्माण से लेकर पिथौरागढ़ की आपदा रेस्क्यू में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पहाड़ में जहां भी आपदा में रेस्क्यू और राहत पहुंचाने की बात होती थी तो ले.कर्नल लाल सबसे पहले तैयार हो जाते थे। वह एक जांबाज पायलट थे और सेना में सेवारत रहते हुए भी उन्होंने बहादुरी के कई किस्से गढ़े।

ले.कर्नल रंजीव लाल भारतीय सेना में पंजाब रेजीमेंट की एविएशन कोर में तैनात रहे। वर्ष 2010 में वह सेना से सेवानिवृत्त हुए। सेना के सेवाकाल में भी उनकी बहादुरी के कई किस्से चर्चित रहे हैं। ऐसा कार्य, जिसे करने में अन्य पायलट झिझकते थे, उसे पूरा करने में कर्नल लाल सबसे आगे रहते थे। सेवानिवृत्त होने के बाद वह एविएशन कंपनियों से जुड़ गए। वर्ष 2012 की उत्तरकाशी में आई आपदा के दौरान वे हेली रेस्क्यू अभियान का हिस्सा रहे। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान भी ले.कर्नल लाल ने रेस्क्यू अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। आपदा के बाद केदारनाथ में जब पुनर्निर्माण शुरू हुए, तब वर्ष 2014 के शीतकाल में पहली बार हेलीकॉप्टर लेकर केदारनाथ पहुंचने वाले पायलट ले.कर्नल लाल ही थे। मौसम खराब होने की स्थिति में भी ले.कर्नल लाल हेलीकॉप्टर की सफल उड़ान भरते थे। वर्ष 2014 व 2015 में उन्होंने वर्षभर केदारनाथ के लिए उड़ानें भरीं और केदारनाथ यात्रा शुरू करने के लिए चले पुनर्निर्माण कार्यों में निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) के साथ मिलकर कार्य किए। हाल ही में अमरनाथ यात्रा में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। बिंदास जीवन जीने वाले ले.कर्नल हर साहसिक कार्य में आगे रहते थे। यही कारण था कि वे जीवनभर अविवाहित रहे।

केदारनाथ पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले निम के तत्कालीन प्रधानाचार्य कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल बताते हैं कि ले.कर्नल रंजीव लाल उनके करीबी मित्र थे। केदारनाथ आपदा के दौरान जुलाई 2013 में समुद्रतल से 15500 फीट ऊंची गौरीकुंड की पहाड़ी पर ले.कर्नल लाल ने हेलीकॉप्टर उतारा था। ऊंचाई वाले इलाकों के मौसम की उन्हें अच्छी जानकारी थी। कर्नल कोठियाल बताते हैं कि अपने पिता को नियमित रूप से फोन करना ले.कर्नल लाल की दिनचर्या में शामिल था। उनके पिता दिल्ली में रहते हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। निम के केदारनाथ मीडिया प्रभारी रहे मनोज सेमवाल बताते हैं कि वर्ष 2017 में पिथौरागढ़ में जो आपदा आई थी, उसमें भी रेस्क्यू और राहत के लिए ले.कर्नल लाल पहुंचे थे। जो भी व्यक्ति उनसे मिलता था, वह उनके जोश एवं जज्बे का मुरीद हो जाता था।

दून के रस्क के दीवाने थे लाल

मनोज सेमवाल बताते हैं कि ले.कर्नल लाल देहरादून के रस्क के दीवाने थे। रेस्क्यू के दौरान भी वह चाय का थर्मस और देहरादून के रस्क अपने साथ रखना नहीं भूलते थे।

पहाड़ में 'कैप्टन लाल' नाम से लोकप्रिय

ले.कर्नल लाल में मानवीयता कूट-कूटकर भरी थी। रेस्क्यू अभियान के दौरान वह लोगों से पूरी तरह घुल-मिल जाते थे। इसलिए उत्तरकाशी से लेकर पिथौरागढ़ तक स्थानीय लोग उन्हें ले.कर्नल रंजीव लाल के नाम से कम और कैप्टन लाल के नाम से ज्यादा जानते हैं।

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'हिल रत्न' सम्मान से नवाजे गए थे लाल

केदारनाथ आपदा और फिर पुनर्निर्माण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ले.कर्नल लाल को वर्ष 2015-16 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 'हिल रत्न' सम्मान से नवाजा था। यह सम्मान उन्हें दिल्ली में प्रदान किया गया था।

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Posted By: Sunil Negi

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