Kedarnath Trekking Route: केदारनाथ पैदल मार्ग पर पिछले तीन सालों में हुई 26 लोगों की मौत, 36 लापता; क्या हैं कारण
केदारनाथ पैदल मार्ग (Kedarnath Trekking Route) पर बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। पिछले तीन वर्षों में 26 लोगों की जान जा चुकी है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 21 किलोमीटर का क्षेत्र संवेदनशील है जहां 13 स्लाइडिंग जोन हैं। प्रशासन ने डीडीआरएफ और पुलिस को तैनात किया है। ट्रेड यूनियन ने बारिश में यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

बृजेश भट्ट, रुद्रप्रयाग। केदारनाथ पैदल मार्ग पर वर्षाकाल शुरू होते ही पत्थर बरसने लगते हैं और घटने लगती हैं दर्दनाक घटनाएं। पिछले तीन वर्षों के आंकड़े देखें तो पैदल मार्ग पर मलबा व पत्थरों की चपेट में आकर अब तक 26 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 36 लोग लापता चल रहे हैं।
वह भी तब, जब डीडीआरएफ व एसडीआरएफ के साथ ही पुलिस के जवान डेंजर जोन में तीर्थ यात्रियों को सकुशलन आवाजाही कराने में मदद करते हैं। साथ ही दुर्घटना होने पर तत्काल बचाव कार्य शुरू कर देते हैं।
सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक 21 किमी क्षेत्र में गौरीकुंड हाईव व केदारनाथ पैदल मार्ग भूस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। वर्षाकाल शुरू होते ही इस पैदल मार्ग पर भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ जाता है। पैदल मार्ग पर 13 स्लाइडिंग जोन हैं और इन स्थानों पर पहाड़ी से भूस्खलन का खतरा लगातार बना रहता है।
भूस्खलन होने से पैदल मार्ग अक्सर अवरुद्ध हो जाता है, जिससे तीर्थ यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। सोनप्रयाग से दो किमी आगे एक्रो ब्रिज के पास, मुनकटिया, गौरीकुंड व घोड़ा पड़ाव और पैदल मार्ग पर जंगलचट्टी, भीमबली के पास, छौड़ी गदेरा, भीमबली के पास, छोटी लिनचोली व बड़ी लिनचोली से आगे स्लाडइिंग जोन हैं। इन स्थानों पर पहाड़ी से कई बार बिना बरसात के भी पत्थर गिरने लगते हैं।
दरअसल, केदारनाथ पैदल मार्ग ऊंची पहाड़ी पर काट कर बनाया गया है, जिससे पहाड़ी से जो भी बोल्डर गिरता है, वह काफी तेज गति से पैदल मार्ग की ओर आता है, जिससे दुर्घटना घटित हो जाती है, और पैदल मार्ग पर चलने वाले यात्रियों को जान बचाने का समय तक नहीं मिल पाता है।
गत वर्ष 2024 की बात करें तो 15 लोगों की मौत तथा 20 लोग लापता हो गए थे। जबकि वर्ष 2023 में 8 की मौत एवं 16 लोग लपता हो गए थे। जबकि इस वर्ष भी अभी तक 3 की मौत भूस्खलन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।
यात्री सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक पांच किमी भी कई बार पैदल ही तय करते हैं। गौरीकुंड कस्बा भी भूस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशी है।
वर्ष 2023 में 4 अगस्त माह में मुख्य बाजार में मंदाकिनी नदी के ठीक ऊपर बनाई गई दो दुकानों पर पहाड़ी से मलबा आने के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, इस घटना में कुल 23 लोग लापता हो गए थे। जिनमें से मात्र 8 शव ही बरामद हुए थे।
इस स्थान पर पूर्व में भी भूस्खलन के कारण जन हानि हुई थी, गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल मार्ग पर प्रत्येक वर्ष पहाड़ी से बोल्डर गिरने के कारण अक्सर दुर्घटनाएं घटित होती रहती है, इसके बावजूद यहां पर पहाड़ी से बोल्डरों व भूस्खलन को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। वहीं केदारनाथ पैदल मार्ग भूस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशील है।
वहीं प्रशासन की ओर से भी पैदल मार्ग पर जगह-जगह डीडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ ही पुलिस भी तैनात की गई है, जो यात्रियां को पैदल मार्ग पर डेंजर जोन में सुरक्षित आवाजाही करवाते हैं, जबकि कई मार्ग कोई भी दुर्घटना होने पर तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू कर देते हैं।
ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष गोविन्द्र सिंह रावत का कहना है कि केदारनाथ पैदल मार्ग पर बारिश में आवाजाही पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए, बारिश के समय भूस्खलन की घटनाएं अधिक होती है, जिससे दर्दनाक हादसे हो रहे हैं।
पिछले तीन वर्षो में केदारनाथ पैदल मार्ग पर हुई घटनाएं
| दिनांक | घटना | घायल-लापता-मौत |
| 4 अगस्त 2023 | केदारनाथ मार्ग पर गौरीकुंड में भुस्खलन | 7 की मौत, 16 लापता |
| 14 अगस्त 2023 | केदारनाथ पैदल मार्ग लिनचैाली में अतिवृष्टि | 1 की मौत, 1 घायल |
| 18 जून 2024 | केदारनाथ पैदल मार्ग पर जंगलचट्टी व भीमबली के बीच एक अस्थाई कच्ची दुकान पर भूस्खलन | 7 घायल |
| 21 जुलाई 2024 | केदारनाथ पैदल मार्ग के चीरबासा में भूस्खलन | 3 की मौत, 5 घायल |
| 31 जुलाई 2024 | केदारनाथ पैदल मार्ग में लिंचोली में अतिवृष्ट | 7 की मौत, 2 घायल, 20 लापता |
| 9 सितम्बर 2024 | सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में भूस्खलन | 5 की मौत, 3 घायल |
| 15 जून 2025 | केदारनाथ पैदल मार्ग पर जंगलचटटी के पास भूस्खलन | 1 की मौत, 3 घायल |
| 18 जून 2025 | केदारनाथ पैदल मार्ग पर जंगलचटटी के पास बोल्डर आया | 2 की मौत, 3 घायल |
केदारनाथ पैदल मार्ग पर डीडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ ही पुलिस बल व अन्य जवान तैनात किए गए हैं। जो यात्रियों को सुरक्षित आवाजाही करवाते हैँ। कोई घटना होने पर तत्काल रेस्क्यू शुरू कर दिया जाता है।
एनएस रजवार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी

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