संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़: सीमांत जिले पिथौरागढ़ का चौपखिया मेला नवमी पर्व पर धूमधाम से संपन्न हुआ। वड्डा क्षेत्र के साथ ही सोर घाटी, काली नदी घाटी क्षेत्र के कई गांवों से पहुंचे लोगों ने चौमू बाबा के दरबार में शीश नवाया।

जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर चौपखिया मंदिर में हर वर्ष नवमी पर्व पर मेले का आयोजन होता है। पिछले दो वर्ष कोरोना संकट के चलते मेले का आयोजन नहीं हो सका था। इस वर्ष मेला धूमधाम से संपन्न हुआ। सुबह से ही श्रद्धालुओं का रू ख चौपखिया की ओर था। लोगों ने विधि विधान से मंदिर में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र के कल्याण के लिए कामना की। दोपहर बाद चौमू देवता का डोला उठा। मंदिर की परिक्रमा के बाद देव डोले में सवार डंगरिया में अवतार हुआ। लोगों ने फूल अक्षतों से चौमू देवता की पूजा-अर्चना की।

मेला स्थल में आए व्यापारियों ने दुकानें सजाई। ग्रामीणों ने मेले से अपनी जरू रत का सामान खरीदा। खाने-पीने की दुकानों में विशेष भीड़ भाड़ रही। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा। इस बीच दूर दराज से लोग मेले में पहुंचे। ======== मेले में हर साल घट रहा है हस्तशिल्प पिथौरागढ़: हस्तशिल्प चौपखिया मेले की विशेष पहचान रहा है। कृषि उपकरणों सहित रिगाल से बनी वस्तुएं डोके, सूप्पे, मोस्टे आदि यहां बहुतायत में आते थे। नेपाल से भी व्यापारी हस्तशिल्प का सामान लेकर मेले में पहुंचते थे, अब नेपाल से व्यापारियों का आगमन लगभग शून्य हो गया है। हस्तशिल्प के उत्पाद भी अब यहां नहीं के बराबर दिखाई देते हैं। मेले की यह खास पहचान अब विलुप्त हो रही है।

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