नाचनी (पिथौरागढ़), संवाद सहयोगी: हिमनद से निकलने वाली रामगंगा नदी (Ramganga River) के जलस्तर में कमी आने के बाद पिथौरागढ़ और बागेश्वर के ग्रामीण अस्थाई पुल बनाने में जुट गए हैं। पुल बनते ही बागेश्वर जिले के आठ गांवों के बच्चों को पढ़ने के लिए नाचनी आने-जाने के लिए अब जानलेवा गरारी और लंबी पैदल दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । बच्चे नाचनी के पास अस्थाई पुल से सीधे नाचनी पहुंचेंगे।

2018 में बादल फटने से बह गया था पुल

नाचनी में पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों को जोडऩे के लिए रामगंगा नदी पर लोहे का पक्का पैदल पुल था। 11 जुलाई 2018 को नामिक क्षेत्र में बादल फटने से रामगंगा नदी उफान पर आयी और पैदल पुल बह गया। पुल बहने के बाद लोनिवि ने यहां पर ट्राली लगाई। भारी ट्राली से नदी पार करने के लिए रस्सी खींचने के लिए दूसरों का सहारा लेना पड़ता है।

  • बागेश्वर से पिथौरागढ़ के नाचनी के विद्यालयों में पढऩे के लिए आने वाले डेढ़ सौ से अधिक बच्चों को नदी पार कराने के लिए उनके अभिभावक दिन में दो बार ट्राली की रस्सी खींचने के लिए रामगंगा नदी तक आना पड़ता है। बागेश्वर के ये गांव नदी से एक किमी से लेकर चार किमी की दूरी पर स्थित हैं। ट्राली जानलेवा बनी है। इसे पार करते समय एक दो लोगों की गिर कर मौत हो गई। दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं।

जलस्तर कम होते ही काम शुरू

जनता इस स्थान पर पुल निर्माण की मांग कर रही है, परंतु पांच साल हो चुके हैं पुल निर्माण नहीं हुआ है। नवंबर, दिसंबर माह में जब हिमानी नदी का जलस्तर कम होता है तो दोनों जिलों के ग्रामीण विगत पांच सालों से यहां पर अस्थाई पुल बनाते आ रहे हैं। यह पुल मई माह में ग्लेशियर पिघलने से नदी का जलस्तर बढ़ते ही बह जाता हैै।

लोनिवि के अधिकारी बोले- प्रस्ताव शासन के पास

व्यापार संघ अध्यक्ष नाचनी हरीश बथ्याल का कहना है कि पांच साल होने जा रहे हैं परंतु सरकार, विभाग और दो जिलों के प्रशासन को पक्का पुल बनाने की सुध तक नहीं आई है। वहीं लोनिवि डीडीहाट और बागेश्वर का कहना है कि पुल का प्रस्ताव शासन के पास है।

Edited By: Rajesh Verma

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