नाचनी (पिथौरागढ़), जेएनएन : नाचनी बाजार में विगत कई वर्षों से दुकान चलाने वाले बागेश्वर जिले के भकूना गांव निवासी एक दुकानदार की रामगंगा नदी पर बने कच्चे पुल से नदी में गिर कर मौत हो गई है।

रामगंगा नदी के दूसरी तरफ स्थित बागेश्वर जिले भकूना गांव निवासी जगत सिंह 48 वर्ष पुत्र भवान सिंह नाचनी में दुकान चलाता था। वह प्रतिदिन गांव से सुबह नाचनी आकर सायं को घर लौटता था। शनिवार की सायं भी वह दुकान बंद कर रामगंगा नदी पर ग्रामीणों के श्रमदान से बने कच्चे पुल से अपने घर जा रहा था। इस दौरान पुल से पैर फिसल जाने से वह रामगंगा नदी में गिर गया। सायं सात बजे तक जब वह अपने घर नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने भकूना के ग्राम प्रधान गंगा सिंह को बताया। परिजन ग्राम प्रधान के साथ उसकी खोजबीन के लिए आए। नाचनी के व्यापारियों को जगत सिंह के घर नहीं पहुंचने के बारे में बताया।

नाचनी व्यापार मंडल अध्यक्ष हरीश बथ्याल और व्यापारियों ने कच्चे पुलिया के पास जाकर तलाश की तो कच्चे पुल से लगभग सौ मीटर दूर जगत सिंह रामगंगा नदी में मिला। उसे तत्काल पांच किमी दूर तेजम अस्पताल ले गए जहां पर चिकित्सक डॉ. आमिर खान ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक नाचनी में दुकान चला कर परिवार का पालन पोषण करता था। उसकी मौत से परिवार सदमे में है। इधर व्यापारियों ने जगत सिंह की मौत पर दुख जताया है। ========== सरकार की उदासीनता का शिकार हुआ व्यापारी

- दो साल पूर्व बहे पुल के स्थान पर नहीं बना है नया पुल नाचनी: नाचनी में रामगंगा नदी पर पक्का झूलापुल था। 11 जुलाई 2018 की अतिवृष्टि में रामगंगा नदी के उफान पर आने से पुल बह गया। दो साल बीतने के बाद भी पुल का निर्माण नहीं किया है। नदी पार करने के लिए ट्रॉली लगाई गई है। इस ट्रॉली से आरपार होने के लिए एक व्यक्ति किनारे पर रस्सी खींचने को चाहिए। सीमा पर लगे बागेश्वर जिले के छह गांवों के प्राथमिक से लेकर इंटर तक के बच्चे पढ़ने नाचनी आते हैं। बच्चों को ट्रॉली से आरपार करने के लिए उनकी माताएं रस्सी खींचती हैं। शीतकाल में जब रामगंगा नदी का जलस्तर कुछ घटता है तो नाचनी और नदी से लगे बागेश्वर के छह गांवों के ग्रामीण प्रतिवर्ष श्रमदान से नवंबर -दिसंबर में कच्चा पुल बनाते हैं। मई आते आते नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल बह जाता है। यदि पक्का पुल होता तो व्यापारी की इस तरह मौत नहीं होती। जिसे लेकर नाचनी में सरकार के खिलाफ रोष बना हुआ है। लोनिवि डीडीहाट के अधिकारी बताते हैं कि पक्के पुल का प्रस्ताव शासन के पास है। दो साल बीतने के बाद भी पुल निर्माण नहीं होने को लेकर सरकार के खिलाफ गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है। ====== पूछताछ और प्रथम दृष्ट्या मामला पैर फिसलने से ही नदी में गिरना प्रतीत हो रहा है। कच्चे पुल में सांझ को चलना खतरनाक रहता है। पैर फिसल कर की व्यापारी के नदी में गिर कर मौत की पूर्ण संभावना है। अन्य किसी तरह की संदेहास्पद जनक स्थिति नहीं है।

- नरेंद्र कुमार, उप निरीक्षक, विवेचना अधिकारी, थाना नाचनी

Posted By: Jagran

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