पिथौरागढ़/धारचूला/मुनस्यारी, जेएनएन : सीमांत में शनिवार की रात को मौसम कुछ नरम रहा, परंतु नरमी में भी कहर बरपा गया। चीन सीमा को जोड़ने वाले दो मार्ग बंद हो गए। अलबत्ता धारचूला-गर्बाधार-लिपुलेख मार्ग पर पांच दिन बाद यातायात सामान्य रहा। पांच दिनों से धारचूला में फंसे व्यास के ग्रामीण अपने गांवों तक पहुंच सके । तहसील मुख्यालय बंगापानी में पहाड़ की तरफ से गिरे पत्थर की चपेट में आने से मकान का एक कमरा ध्वस्त हो गया। गनीमत रही कि इस कमरे में किसी के नहीं होने से बड़ा हादसा टल गया। चौना-इमला सड़क दलदल बन चुकी है। सुरिगगाड़ पर लोनिवि द्वारा बिना रेलिंग का एक कच्चा पुल बना दिया गया है। बरम के मेतलीत में भारी भूस्खलन से राजकीय प्राथमिक विद्यालय देवलेक खतरे में आ गया है।

डीडीहाट तहसील क्षेत्र में सर्वाधिक 37.50 एमएम बारिश हुई। बेरीनाग में 19.80 एमएम, धारचूला में 2.4 एमएम, मुनस्यारी में चार एमएम बारिश हुई। पिथौरागढ़ और गंगोलीहाट में मौसम शुष्क रहा।

धारचूला : नगर के समैजी मंदिर के पास हुए भूस्खलन से एक परिवार पर आसन्न संकट बना हुआ है। नगर के बीच में हुए इस भूस्खलन से आसपास के क्षेत्र में दशहत बनी है। शीघ्र सुरक्षा के उपाय नहीं किए जाने पर कई मकानों को खतरा हो सकता है। वहीं चीन सीमा को जोड़ने वाला तवाघाट-सोबला-तिदांग मार्ग पंपाबे और युरू ंग के पास लगभग तीन सौ मीटर सड़क ध्वस्त होने से बंद है। जिसके चलते उच्च हिमालय के 14 गांव सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, बौगलिंग, दुग्तू, दांतू, गो, ढाकर , तिदांग, सीपू, मार्छा, विदांग, सौन अलग-थलग पड़ चुके हैं।

मुनस्यारी : मुनस्यारी से चीन सीमा तक जाने वाला मुनस्यारी मिलम मार्ग दगधार सहित जिमिघाट-लिलम के मध्य दो अन्य स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। मार्ग बंद होने से बुई, पातों, साइपौलो, जिमिघाट, लीलम, रिलकोट, लास्पा, बुगडियार, खैंलाच, पांछू, गनघर, मर्तोली, मापा, ल्वां, मिलम, टोला, बिल्जू आदि का संपर्क भंग है। बीते सप्ताह इसी पैदल मार्ग में सुरिग गाड़ में बहे पुल के स्थान पर लोनिवि द्वारा पटरे बिछा कर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, परंतु सुरक्षा के लिए रेलिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

बंगापानी : बंगापानी में शनिवार की रात को अचानक पहाड़ की तरफ से गिरे एक बोल्डर की चपेट में आकर मकान क्षतिग्रस्त हो गया। जिस कमरे पर बोल्डर गिरा उस कमरे में किसी के नहीं होने से बड़ा हादसा टल गया। रात्रि के लगभग तीन बजे पहाड़ की तरफ से एक पत्थर और मलबा गिरा। बंगापानी बाजार में पुष्कर सिंह जंगपांगी के मकान पर गिरा। मकान के जिस कमरे के ऊपर पत्थर गिरा उससे कमरा ध्वस्त हो गया और पूरा मकान हिल गया। इस दौरान तेज आवाज होने से पूरे बंगापानी तहसील के लोग जाग गए और पुष्कर सिंह के परिवार के लोगों ने बाहर की तरफ दौड़ लगा दी। बंगापानी में अफरा तफरी मच गई। घटनास्थल के पास ही एक ट्रक में सो रहा चालक भी बाल-बाल बचा पत्थर ट्रक को छूते हुए निकला। ट्रक में सो रहे चालक ने चिल्लाते हुए कूद मार दौडृ लगा दी। जिस मकान पर पत्थर गिरा उससे मात्र तीन-चार मीटर की दूरी पर एसबीआइ का एटीएम और बैंक शाखा है। दोनों बाल-बाल बचे हैं। =========== पूर्व में भी बंगापानी में पहाड़ से गिर चुके हैं बोल्डर बंगापानी सुरक्षित माना जाता है। जौलजीेबी-मुनस्यारी मोटर मार्ग से लगभग सौ मीटर दूर बहने वाली गोरी नदी के मध्य स्थित बंगापानी कस्बा एक तरफ गोरी नदी के कटाव तो दूसरी तरफ नब्बे डिग्री के कोण पर स्थित विशाल पहाड़ी के कोप को भोग रहा है। वर्ष 2015 से पूर्व यह सुरक्षित माना जाता था। 2015 में पहली बार यहां पर पहाड़ से बोल्डर गिरे दो मकान इसकी चपेट में आए और दो लोगों की मौत हुई थी। एक वर्ष पूर्व 2019 में दोपहर को ही पहाड़ की तरफ से पत्थर गिरे और दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। एक स्वर्णकार का सोना, चांदी, गहने सहित घर में रखा हुआ सारा सामान मलबे में दब गया था। तब दिन की घटना होने से लोगों ने भाग कर जान बचाई थी। युवा समाजसेवी हीरा सिंह चिराल ने बार-बार पहाड़ से पत्थर गिरने की घटना को गंभीर बताते हुए भूगर्भीय जांच की मांग की है।

Edited By: Jagran