पिथौरागढ़, जेएनएन : सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआइ) के तहत सूचना देने में बिलंब को राज्य सूचना आयुक्त ने गंभीरता से लेते हुए पिथौरागढ़ एआरटीओ पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिनेश चंद्र पाठक ने जिले में संचालित टैक्सियों में पलटी (यात्रियों की अदला-बदली) को लेकर एआरटीओ विभाग से 13 दिसंबर 2018 को सूचना मांगी थी, उन्हें छह माह तक अपीलीय अधिकारी से कोई सूचना नहीं दी गई। डॉ. पाठक ने 13 जून 2019 को प्रथम अपीलीय अधिकारी संभागीय परिवहन अधिकारी हल्द्वानी के यहां अपील की। इस अपर उन्होंने एआरटीओ को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

मामला आयोग में पहुंचा। राज्य सूचना आयुक्त जेपी ममगाई ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई की। लोक सूचना अधिकारी तत्कालीन एआरटीओ नवीन कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि डॉ. पाठक का सूचना अनुरोध पत्र अंतरित होकर उनके कार्यालय में प्राप्त ही नहीं हुआ। पांच जुलाई 2019 को उन्हें संभागीय परिवहन कार्यालय हल्द्वानी के माध्यम से उन्हें अनुरोध पत्र की सूचना मिली। जिस पर उन्होंने सूचना उपलब्ध कराई। सुनवाई में मौजूद डॉ. पाठक ने कहा कि उन्हें दी गई सूचनाओं के साथ संलग्नक नहीं दिए गए।

सूचना आयुक्त जेपी ममगाई ने कहा कि जिला कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने अपीलार्थी का पत्र एआरटीओ को 13 अगस्त को ही पंजीकृत डाक से प्रेषित कर दिया था। सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना 30 दिन के अंदर अपीलार्थी को दी जानी चाहिए थी। किन्हीं कारणों से सूचना नहीं दी जा सकती तो कारणों सहित इसकी जानकारी देनी अनिवार्य है। इस मामले में दोनों ही नियमों का पालन नहीं हुआ जो सूचना अधिकार अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। आयुक्त ने इसके लिए एआरटीओ नवीन सिंह पर दस हजार रुपये का दंड लगाया है। जुर्माने की धनराशि वसूलने का दायित्व संभागीय परिवहन कार्यालय नैनीताल को दी गई है।

Posted By: Jagran

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