विजेंद्र मेहता, डीडीहाट: समुद्र तट की गर्म जलवायु की टी पर्न प्रजाति मध्य हिमालय के अति नमी वाले जंगल में कैसे पहुंची इसका रहस्य खुलने से पहले ही टी पर्न प्रजाति पर संकट के बादल छा गए हैं। संरक्षण के अभाव में इसे काटे जाने से अब इसकी संख्या अंगुलियों में गिनने भर रह चुकी है। तब जाकर वन विभाग को भी इसकी सुध आई है।

समुद्र तट की गर्म जलवायु में पाई जाने वाली टी पर्न मध्य हिमालय में स्थित डीडीहाट के पमतोड़ी , देवीसूना जंगल में पाई गई। इस वनस्पति के मध्य हिमालय के नमी वाले क्षेत्र में उगने और सफल होने को लेकर वनस्पति विज्ञानी भी हैरान में हैं। पर्न प्रजाति की एक प्रजाति एल्सोफिला स्पाईनोसनोला साइफिया सीमांत पिथौरागढ़ जिले की डीडीहाट तहसील के पमतोड़ी और देवीसूना जंगल में पाई गई। इसका पता वर्ष 2002 में चला। समुद्र तट की जलवायु हिमालय तक कैसे पहुंची इस संबंध में शोध तभी से चलने लगा। अभी तक टी पर्न के यहां पनपने के सार्थक नतीजे सामने नहीं आए हैं।

पमतोड़ी के जंगल में साइफिया के 15 फीट तक ऊंचाई के टी पर्न हैं। यहां बीते वर्षों तक इनकी स ंख्या सौ से डेढ़ सौ थी। साइफिया की पत्तियां केले की तरह लंबी और बिखरी हैं। जिस स्थान पर साइफिया है वह स्थान जिले में सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है यहां पर 70 फीसद से अधिक नमी बनी रहती है। पीजी कालेज बेरीनाग के वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. जेएन पंत का कहना है कि यह वनस्पति कैसे डीडीहाट पहुंची यह अभी भी शोध का विषय है। विषम भौगोलिक स्थिति में अपने को बचाने वाली इस वनस्पति के बारे में शोध चल रहा है। वनस्पति शास्त्री बताते हैं कि प्राचीन गु्रप की इस वनस्पति को डायनासोर का भोजन माना जाता है। वर्तमान में यह वनस्पति दक्षिण भारत के समुद्रतटीय क्षेत्र, अंडमान निकोबार, मलेशिया, आस्ट्रेलिया, अमेरिका के अलावा अन्य ट्रापिकल क्षेत्रों में पाई जाती है।

शोध के इस क्रम में डीडीहाट के टी पर्न के संरक्षण के लिए वर्ष 2003 में कुमाऊं विश्वविद्यालय परिसर नैनीताल में दो पौधे रोपे गए तमाम जतन के बाद भी दोनो पौधे सूख गए थे। एक तरफ यह चलता रहा। दूसरी तरफ टी पर्न पर हसिया चलती रही। ग्रामीण इसके पत्तों को जानवरों के नीचे बिछाने के लिए काटते रहे। अब इनकी संख्या अंगुलियों में गिनने भर रह चुकी है। तब जाकर वन विभाग सतर्क हुआ है। बीते दिनों वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर इनके संरक्षण के लिए कदम उठाए हैं। वन रेंजर के अनुसार अब इनकी नियमित निगरानी की जा रही है।

टी फर्न के लाभ 1.यूरिन इंफेंक्शन के उपचार में लाभदायक

2. कान में संक्रमण में लाभदायक

3. सुजाक रोग में उपयोगी

4. त्वचा संक्रमण में उपयोगी

5. बैक्टीरियल संक्रमण में लाभदायक

6. टाइफाइड के उपचार में लाभदायक

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस