संवाद सूत्र, थल/ बेरीनाग: उत्तराखंड के लोक गायक पप्पू कार्की के नए गीत अब राज्य के लोगों को नहीं सुनाई देंगे। संगीत के माहिर इस लोक कलाकारों को काल के क्रूर हाथों ने छीन लिया।

कार्यक्रम प्रस्तुत कर लौट रहे पप्पू कारी की हैड़ाखान के पास हुई वाहन दुर्घटना में मौत हो गई। पप्पू की मौत की खबर मिलते ही उनके गांव सेलावन में मातम पसर गया। देश विदेश में रहने वाले उत्तराखंडवासियों में बेहद लोकप्रिय इस युवा कलाकार की मौत पर लोगों को विश्वास नहीं हो रहा है। पप्पू की माता कमला देवी गांव में ही खेतीबाड़ी करती हैं। उनकी पत्नी कविता और छह वर्षीय पुत्र दक्ष हल्द्वानी में रहते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक विशन सिंह चुफाल, विधायक मीना गंगोला, सांसद भगत सिंह कोश्यारी, ब्लाक प्रमुख रेखा भंडारी, पूर्व विधायक नारायण राम आर्य, देवराज सिंह सत्याल, अर्जुन सिंह रावत सहित तमाम लोगों ने गहरा दुख जताया है।

रामलीला से शुरू हुई संगीत की शुरू आत थल: गांव में ही पले बढ़े पप्पू ने 25 वर्ष पूर्व गांव की रामलीला से अपने संगीत सफर की शुरू आत की थी। अभिनय के साथ ही साथ वे विभिन्न पात्रों के लिए गायन भी करते थे। राइका प्रेमनगर के शिक्षक किशन सिंह कार्की ने उन्हें संगीत में कैरियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। रामा कैसेटस ने उनका पहला संगीत एलबम जारी किया। 2010 में आया एलबम झम्म लादगी जबरदस्त हिट हुआ। 2009 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित गायक, 2014 में सर्वश्रेष्ठ गायक, 2015 में गोपाल बाबू गोस्वामी अवार्ड से सम्मानित किया गया। मुम्बई में हर वर्ष आयोजित होने वाले कौथिक में उनकी विशेष डिमांड रहती थी।

Posted By: Jagran

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