संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़ : पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष पहचान माल्टे के फल का अब पूरा उपयोग होगा। फल से जूस तैयार करने के बाद छिलके का उपयोग ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में किया जाएगा। इसके बीजों से नर्सरी भी तैयार की जाएगी। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत इसके लिए जिले में बंद पड़ी एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट को फिर से चालू कर दिया है।

विकास खंड कनालीछीना में पिछले आठ वर्षो से बंद पड़ी फूड प्रोसेसिंग यूनिट को जिला प्रशासन ने एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना को सौंप दिया है। परियोजना ने इस इकाई का जीर्णोद्वार कर लिया है। इस इकाई में माल्टे का जूस तैयार किया जाएगा। उपयोग के बाद फेंक दिए जाने वाले छिलके को पीसकर ब्यूटी प्रोडेक्ट तैयार होगा। यह प्रोडक्ट बेंगलुरु भेजा जाएगा। इसके लिए बेंगलुरु की कंपनी से परियोजना का करार हुआ है। माल्टा के छिलके वैज्ञानिक तरीके से सुखाने के लिए सौर ऊर्जा चालित ड्रायर भी यूनिट में स्थापित कर लिया गया है। अंत में बचने वाले माल्टे के बीज भी बेकार नहीं फेंके जायेंगे। प्रोसेसिंग यूनिट के परिसर में ही नर्सरी तैयार की जाएगी। नर्सरी में तैयार होने वाली पौध क्षेत्र के किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना से जुड़े किसानों को इससे सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

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आठ रुपये किलो की दर से खरीदा जाएगा माल्टा

एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना उत्पादकों से आठ रुपये किलो की दर से माल्टा खरीदेगी। परियोजना अधिकारी कुलदीप बिष्ट ने बताया कि प्रोसेसिंग यूनिट तक माल्टा पहुंचाने पर यह रेट दिया जाएगा। रोड हेड में माल्टा उपलब्ध कराने पर सात रुपये किलो की दर से भुगतान किया जाएगा।

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कनालीछीना में फूड प्रोसेसिंग यूनिट से 97 समूहों के 3287 परिवार जोड़े गए हैं। ये परिवार माल्टा उपलब्ध कराने के साथ ही उसकी प्रोसेसिंग में भी कार्य करेंगे। गर्मियों के लिए जूस के साथ की कच्चा जूस भी तैयार किया जा रहा है जिसे देहरादून की कंपनी को उपलब्ध कराया जाएगा। माल्टा छीलने का कार्य करने वाली महिलाओं को तीन रुपये किलो की दूर से भुगतान होगा।

- कुलदीप बिष्ट, परियोजना प्रबंधक

Posted By: Jagran

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