संवाद सूत्र, धारचूला : भारत विरोध के साथ अब नेपाल का रवैया काफी खराब होने लगा है। अब परंपराओं पर भी नेपाली प्रशासन हेकड़ी दिखाने लगा है। सोमवार को रक्षाबंधन पर्व पर बहनों के अपने भाईयों के घर जाने के लिए झुलापुल खोलने के वायदे से नेपाली प्रशासन मुकर गया। इससे स्थानीय लोगों में तीव्र आक्रोश व्याप्त है।

भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। इसी के चलते रक्षाबंधनपर्व पर काफी संख्या में महिलाएं एक-दूसरे देश की सीमा को पार करके अपने भाईयों को राखी बांधते उनके घर आती-जाती रही हैं। इस वर्ष लॉकडाउन के चलते पुल बंद है। सोमवार को रक्षाबंधन के चलते भारत-प्रशासन और नेपाल के तहसील प्रशासन के मध्य सोमवार को पुल खुलने की सहमति बनी थी। इसके लिए सुबह दस बजे और सायं पांच बजे का समय निर्धारित किया गया था। सुबह दस बजे से दस बजकर बीस मिनट तक पुल खुलना था। इस अवधि में बहनें अपने भाईयों के घर जाती और सायं पांच बजे पुल खुलने के बाद बीस मिनट खुलना था। इस दौरान बहनें एक दूसरे देश से अपने देश लौटती ।

इस निर्णय के बाद भारत में रहने वाली बहनों ने तहसील प्रशासन को अपने नाम, पते नोट करा दिए थे। तहसील प्रशासन द्वारा 70 महिलाओं को नेपाल जाने के पास जारी किए गए थे। पास मिलने के बाद सोमवार सुबह दर्जनों महिलाएं भारत-नेपाल को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय पुल पर पहुंच गई और पुल खुलने की प्रतीक्षा करती रही। भारत की ओर तो पुल खुल गया परंतु नेपाल की तरफ पुल नहीं खुला। इस पर नेपाल के मुख्य विकास अधिकारी से संपर्क किया गया। दार्चुला के सीडीओ ने पुल खोलने से मना कर दिया। दार्चुला प्रशासन द्वारा पुल नहीं खोले जाने से निराश महिलाएं वापस लौट आई।

नेपाल प्रशासन की इस हरकत से धारचूला में आक्रोश फैल गया है। धारचूलावसियों का कहना है कि यदि कोई नेपाल व्यक्ति वहां बीमार होता है या फिर किसी को आवश्यक कार्य से भारत आना होता है तो नेपाल प्रशासन के अनुरोध पर भारतीय प्रशासन तुरंत पुल खोल देता है। इधर सोमवार को रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर नेपाली प्रशासन द्वारा पुल नहीं खोला गया। इस कारण भारत में ब्याही गई कई महिलाएं नेपाल में मायके नहीं जा सकी और रक्षाबंधन पर्व नहीं मना सकी।

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