29 साल बाद मिला उत्तराखंड के नायक ध्यान सिंह के बलिदान को सम्मान, 1996 में दिया था सर्वोच्च बलिदान
सीमा सुरक्षा बल के नायक ध्यान सिंह को जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने के 29 ...और पढ़ें


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संवाद सूत्र, डीडीहाट। सीमांत तहसील डीडीहाट के 34 हाट थर्प निवासी सीमा सुरक्षा बल के नायक ध्यान सिंह के बलिदान को 29 साल बाद आधिकारिक पहचान मिली है। महानिदेशालय सीमा सुरक्षा बल, नई दिल्ली ने उन्हें आपरेशनल कैजुअल्टी प्रमाणपत्र जारी किया है। बल के अधिकारियों ने बलिदानी के घर जाकर उनके स्वजन को प्रमाणपत्र सौंपा।
नायक (सामान्य ड्यूटी) ध्यान सिंह पुत्र किशन सिंह सात मार्च 1981 को बीएसएफ में भर्ती हुए थे। ध्यान सिंह ने नौ अक्टूबर 1996 को 135 बटालियन के साथ भारत-पाक वास्तविक नियंत्रण रेखा, एफडीएल हाथी, बांदीपुर (जम्मू-कश्मीर) में तैनाती के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।
नौ अक्टूबर 1996 की शाम करीब 4:10 बजे नायक ध्यान सिंह चार अन्य जवानों के साथ एआइ निरीक्षण के बाद एफडीएल हाथी से एफडीएल राणा के लिए रवाना हुए। पार्टी का नेतृत्व नायक ध्यान सिंह ही कर रहे थे। बर्फीले रास्ते में फिसलने से वह गहरे नाले में गिर गए। अंधेरा होने के कारण साथी जवानों को इसका पता नहीं चला। रात 10 बजे एफडीएल राणा पहुंचने पर उनके लापता होने की सूचना दी गई।
अगले दिन सर्च आपरेशन के दौरान सुबह चार बजे उनका पार्थिव शरीर गहरे नाले से बरामद हुआ। इधर, जांच पूरी होने के बाद अब सीमा सुरक्षा बल निदेशालय की ओर से नायक ध्यान सिंह का आपरेशन कैजुअल्टी प्रमाणपत्र जारी किया गया है। बल के अधिकारियों ने बलिदानी के घर जाकर उनके स्वजन को प्रमाणपत्र सौंपा।
