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उत्तराखंड में आपदा के एक माह बाद पीड़ित को मिला राशन, परिवार ने लौटाई राहत सामग्री

Published: Fri, 21 Aug 2026 11:55 PM (IST)Updated: Sat, 22 Aug 2026 06:03 AM (IST)

मुनस्यारी में भारी बारिश से घर ढहने के एक माह बाद पीड़ित परिवार को मामूली राहत सामग्री मिली, जिसे उन्होंने ...और पढ़ें

आपदा पीड़ित परिवार ने एक माह बाद प्रशासन द्वारा दी गई राहत सामग्री लौटाई।

आपदा पीड़ित परिवार ने एक माह बाद प्रशासन द्वारा दी गई राहत सामग्री लौटाई।

HighLights

  1. दुर्गा राम का घर बारिश से ढहा, एक माह बाद भी राहत नहीं।

  2. मामूली राहत सामग्री को पीड़ित परिवार ने लौटाया, अपमान महसूस किया।

  3. 'बेनाप भूमि' पर घर होने से सरकारी मदद में अड़चन।

संवाद सूत्र, मुनस्यारी। मुनस्यारी के नया बस्ती बूंगा में 20 जुलाई को हुई भारी बारिश के कारण दुर्गा राम का आवासीय भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ढह गया था। अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाला यह पीड़ित परिवार अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के एक माह बीत जाने के बाद भी जब कोई सुध नहीं ली गई, तो जनप्रतिनिधियों के घर पहुंचने पर प्रशासन हरकत में आया।

आरोप है कि इसके बाद पट्टी पटवारी ने मौके पर पहुंचकर परिवार को बताया कि उनका आवास बेनाप भूमि पर बना है, इसलिए उन्हें सरकारी राहत नहीं मिल सकती। परिवार का यह भी कहना है कि आसपास कई बड़े भवनों का अवैध निर्माण हो रहा है, लेकिन प्रशासन की नजर उन पर नहीं पड़ रही है।

घटना के पूरे एक महीने बाद प्रशासनिक टीम ने पीड़ित परिवार को राहत सामग्री के रूप में कथित तौर पर दो किलो चावल, आधा लीटर रिफाइंड तेल, दो डिब्बी माचिस, दो पैकेट बिस्कुट और एक बोतल पानी मुहैया कराया।

इतने लंबे इंतजार के बाद बेहद मामूली और अपर्याप्त सामग्री मिलने से आहत परिवार ने इसे अपने आत्मसम्मान के खिलाफ माना और तहसील पहुंचकर सामग्री वापस करने का निर्णय लिया।

हालांकि, तहसीलदार के किसी बैठक में व्यस्त होने के कारण कार्यालय का दरवाजा बंद मिला, जिसके चलते पीड़ित परिवार वह राहत सामग्री कार्यालय के बाहर ही छोड़कर वापस लौट आया। इस अमानवीय और लचर प्रशासनिक रवैये को लेकर स्थानीय जनता में भी गहरा आक्रोश व्याप्त है।

भारी बारिश से मेरा मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और परिवार बेघर हो गया। एक महीने बाद प्रशासन ने राहत के नाम पर महज दो किलो चावल और कुछ सामान दिया, जो हमारे साथ भद्दा मजाक है। -दुर्गा राम, पीड़ित।

आपदा पीड़ित एक माह से दर-दर भटक रहे हैं और प्रशासन महज खानापूर्ति कर रहा है। गरीबों के प्रति इस तरह की उदासीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -मनोहर टोलिया, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस।

जिला मुख्यालय से जो सामग्री मिली थी वह परिवार को दी गई। पीड़ित का मकान बेनाप भूमि पर है, जिसके चलते पटवारी कि रिपोर्ट नहीं लग सकती है। इसकी रिपोट आगे भेज दी है। -ललित मोहन तिवारी एसडीएम मुनस्यारी।

मुनस्यारी में आपदा पीड़ितों की राहत में बेनाप भूमि का अड़गा

मुनस्यारी तहसील क्षेत्र में आपदा में आवास गंवाने वाले पीड़ितों के लिए बेनाप भूमि का मसाला बहुत बड़ा अड़ंगा बना हुआ है। इसका निराकरण शासन स्तर पर ही संभव है। पूर्व में शासन देना भूमि को नियमिती करण कर आपदा पीड़ितों को विस्थापित कर चुका है।

बीते वर्षों में तहसील बंगा पानी के तांगा गांव के आपदा प्रभावितों को सेरा की बेनाप भूमि ही विस्थापित किया गया है। कोई मुनस्यारी की नया बस्ती में भी बेनाप भूमि है यहां पर कुलथम गांव के आपदा पीड़ितों को भी बसाया गया है।

वर्ष 1913 की आपदा में भी धारचूला और मुनस्यारी तहसील के कई लोगों को देना भूमि ही विस्थापित किया गया है। मुनस्यारी में आपदा पीड़ित परिवार भूमिहीन है। क्षेत्र में भूमिहीन आपदा पीड़ितों की संख्या भी काफी है।

इस तरह के भूमिहीन आपदा पीड़ितों के विस्थापन के लिए सरकार और शासन को मानवीय पक्ष बिना भूमि के नियमितीकरण कर विस्थापित करने की मांग लगातार की जाती है।